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| रीवा में कथित ठगी का सनसनीखेज मामला: केंद्रीय मंत्रियों और अफसरों से ऊंची पहुंच का झांसा देकर करोड़ों के सरकारी काम दिलाने के नाम पर ऐंठे लाखों रुपए |
रीवा - मध्य प्रदेश के रीवा जिले से कथित ठगी का एक ऐसा बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है, जिसने क्षेत्र के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अलग-अलग राज्यों और जिलों के कई पीड़ितों ने एक ही शातिर व्यक्ति के खिलाफ सरकारी नौकरी लगवाने, विभिन्न विभागों में टेंडर (ठेका) दिलाने, रुका हुआ सरकारी भुगतान (पेमेंट) निकलवाने तथा देश के बड़े राजनेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों से बेहद करीबी संबंध होने का दावा कर लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में सभी पीड़ितों ने साक्ष्यों के साथ रीवा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी लिखित शिकायतें दर्ज कराई हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कर आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।
पुलिस को सौंपे गए शिकायती पत्रों के अनुसार, यह संगीन आरोप अभय राज सिंह (पिता अजयपाल सिंह), निवासी रतहरा मस्जिद के पीछे, थाना समान, जिला रीवा पर लगाए गए हैं। हालांकि, पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह सभी आरोप वर्तमान में शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं, जिनकी वास्तविक सत्यता और कानूनी पुष्टि विस्तृत पुलिस तफ्तीश और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ठगी का एक जैसा 'मोडस ऑपेरंडी' (काम करने का तरीका)
पुलिस को प्राप्त हुए अलग-अलग आवेदनों का बारीकी से अध्ययन करने पर यह साफ होता है कि आरोपी ने सभी पीड़ितों के साथ ठगी करने के लिए लगभग एक जैसा ही तरीका (Modus Operandi) अपनाया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपी अभय राज सिंह पहले खुद को एक बेहद रसूखदार और प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में पेश करता था। विश्वास जीतने के लिए वह देश के केंद्रीय मंत्रियों, राज्य के बड़े नेताओं और वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस अधिकारियों से अपनी घनिष्ठ रिश्तेदारी या उठना-बैठना होने का दावा करता था। जब पीड़ित उसके इस रसूख के प्रभाव में आ जाते थे, तो वह उन्हें सरकारी नौकरी, सरकारी योजनाओं में बड़े ठेके दिलाने या विभागों में फंसा हुआ भुगतान चंद दिनों में क्लियर कराने का भरोसा देकर मोटी रकम की मांग करता था। पीड़ितों का कहना है कि राशि लेने के बाद जब काम पूरा नहीं होता था, तो आरोपी द्वारा महीनों तक तरह-तरह के बहाने बनाए जाते रहे। अंत में जब पीड़ितों ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की, तो आरोपी ने कथित रूप से उनके फोन नंबरों को ब्लॉक कर दिया और उन्हें धमकी दी।
केस स्टडी 1: पटवारी की नौकरी के नाम पर ₹6.50 लाख की चपत
पहला मामला सीधी जिले के रामपुर नैकिन का है। पीड़ित बबलू विश्वकर्मा ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि वर्ष 2023 में उनकी मुलाकात कुछ परिचितों के माध्यम से रीवा के अभय राज सिंह से कराई गई थी। आरोपी ने खुद को शासन-प्रशासन में बेहद मजबूत पकड़ रखने वाला व्यक्ति बताया और पीड़ित को पटवारी की सरकारी नौकरी लगवाने का शत-प्रतिशत भरोसा दिया। इस झांसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग किश्तों में कुल 6.50 लाख रुपये आरोपी को सौंप दिए। लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली और आरोपी टालमटोल करने लगा, तब पीड़ित को ठगे जाने का अहसास हुआ। अब न तो पीड़ित के पास नौकरी है और न ही उसका पैसा वापस मिल रहा है।
केस स्टडी 2: फंसे हुए वाहन को छुड़ाने के नाम पर ₹3.50 लाख ऐंठे
दूसरी शिकायत भी सीधी जिले के निवासी अखिलेश कुमार कुशवाहा द्वारा दर्ज कराई गई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनका एक कमर्शियल वाहन किसी कानूनी पचड़े में फंस गया था। इस दौरान आरोपी ने अधिकारियों से सीधे संपर्क होने का दावा करते हुए वाहन को बिना किसी परेशानी के तत्काल छुड़ाने का सौदा किया और इसके एवज में पीड़ित से 3.50 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित का आरोप है कि काम तो हुआ नहीं, बल्कि जब उसने अपनी गाढ़ी कमाई के पैसे वापस मांगे, तो आरोपी अभय राज सिंह ने उसके साथ अभद्र गाली-गलौज की और शिकायत करने पर जान से मारने की गंभीर धमकी भी दी।
केस स्टडी 3: गाजियाबाद की महिला से सबसे बड़ी ठगी; सदमे में पति की मौत
इस पूरे कथित रैकेट में सबसे बड़ा और हृदयविदारक मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की रहने वाली महिला माया त्यागी ने दर्ज कराया है। महिला द्वारा रीवा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, आरोपी अभय राज सिंह ने खुद को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर सहित देश के कई दिग्गज नेताओं और शीर्ष अधिकारियों का सगा रिश्तेदार बताकर उनके पूरे परिवार का विश्वास जीत लिया था। महिला के अनुसार, उनके पति एसजीपी पाइप (SGP Pipe) का व्यवसाय करते थे और उत्तर प्रदेश जल निगम में सरकारी सामग्री की आपूर्ति (सप्लाई) करते थे। जल निगम आगरा में उनका लगभग 80 से 85 लाख रुपये का बड़ा भुगतान काफी समय से रुका हुआ था। आरोपी ने अपनी कथित ऊंची पहुंच का इस्तेमाल कर इस रुके हुए भुगतान को तुरंत जारी करवाने का झांसा दिया। इसके साथ ही उसने केंद्र सरकार की अन्य बड़ी विकास योजनाओं में भी आकर्षक ठेके दिलाने का लालच दिया और अलग-अलग समय पर कुल 37.80 लाख रुपये ले लिए। पीड़िता का आरोप है कि इस भारी-भरकम राशि में से लगभग 15 लाख रुपये नकद (कैश) लिए गए, कुछ राशि आरोपी के बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई और शेष राशि विभिन्न बड़े अधिकारियों को रिश्वत के तौर पर देने के नाम पर ली गई। इस बड़ी रकम की व्यवस्था करने के लिए पीड़ित परिवार को अपना एक कीमती प्लॉट तक गिरवी रखना पड़ा था।
आर्थिक तंगी और अवसाद ने ली जान:
पीड़ित महिला ने अत्यंत भावुक आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार होते आर्थिक नुकसान, कर्ज के बोझ और मानसिक प्रताड़ना के चलते उनके पति गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में चले गए, जिसके कारण अंततः उनकी दुखद मृत्यु हो गई। पति के निधन के बाद भी महिला लगातार अपनी रकम वापस पाने के लिए आरोपी से मिन्नतें करती रही, लेकिन आरोपी द्वारा कभी खुद की गंभीर बीमारी, कभी कोरोना, तो कभी हार्ट अटैक आने का झूठा बहाना बनाया जाता रहा। आखिरकार, कुछ समय बाद आरोपी ने महिला के सभी संपर्क नंबरों को ब्लॉक कर दिया।महिला ने यह भी सनसनीखेज खुलासा किया कि आरोपी खुद को कभी भारत सरकार का 'लेबर कमिश्नर' बताता था, तो कभी अपनी पत्नी को वन विभाग में 'एसडीओ' (SDO) के पद पर पदस्थ बताता था, ताकि लोग उसकी बातों को सच मान लें।
कथित बातचीत के ऑडियो और ठगी का कुल आंकड़ा
इस पूरे मामले में एक और नया मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया और पीड़ितों के माध्यम से कुछ कथित ऑडियो क्लिप भी सामने आई हैं। इन ऑडियो में शिकायतकर्ता महिला और आरोपी के बीच लंबी बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। बातचीत के दौरान आरोपी अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए, काम पूरा कराने का पक्का आश्वासन देता नजर आ रहा है। साथ ही इसमें बड़ी सरकारी परियोजनाओं, भर्तियों और रुपयों के लेनदेन का स्पष्ट उल्लेख सुनाई दे रहा है। हालांकि, इन वायरल ऑडियो की सत्यता की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यह पूरी तरह से पुलिस की फॉरेंसिक जांच का विषय है।
अब तक सामने आई शिकायतों के अनुसार कुल कथित ठगी का विवरण:
| शिकायतकर्ता का नाम | निवासी | कथित ठगी की राशि |
| 1. श्री बबलू विश्वकर्मा | रामपुर नैकिन (सीधी) | ₹6,50,000/- |
| 2. श्री अखिलेश कुमार कुशवाहा | सीधी | ₹3,50,000/- |
| 3. श्रीमती माया त्यागी | गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) | ₹37,80,000/- |
| कुल कथित राशि | लगभग ₹47.80 लाख |
पुलिस कार्रवाई की तैयारी
रीवा जिले के तीनों शिकायतकर्ताओं ने संयुक्त रूप से पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस अंतरराज्यीय प्रभाव वाले कथित ठगी के मामले में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए और आरोपी के बैंक खातों व चल-अचल संपत्ति की जांच की जाए। इस संबंध में स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। बैंक ट्रांजैक्शन और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
(अस्वीकरण: यह समाचार पूर्णतः शिकायतकर्ताओं द्वारा पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किए गए शिकायती पत्रों, दर्ज कराए गए बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है। इन आरोपों की सत्यता की अंतिम पुष्टि होना अभी पुलिस जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया में शेष है। समाचार माध्यम किसी भी पक्ष पर दोषारोपण नहीं करता है। मामले में आरोपी पक्ष का वक्तव्य या स्पष्टीकरण सामने आने पर उसे भी निष्पक्षता के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
