केंद्रीय मंत्रियों से रिश्तेदारी बताकर ठगी के आरोपों पर अभय राज सिंह का पलटवार, बोले- "मेरे खिलाफ रची जा रही है साजिश"

केंद्रीय मंत्रियों से रिश्तेदारी बताकर ठगी के आरोपों पर अभय राज सिंह का पलटवार, बोले- "मेरे खिलाफ रची जा रही है साजिश"

रीवा - गाजियाबाद निवासी एक महिला द्वारा रीवा निवासी अभय राज सिंह पर करोड़ों की सरकारी योजनाओं में भागीदारी दिलाने और केंद्रीय मंत्रियों से रिश्तेदारी का हवाला देकर लाखों रुपये की ठगी करने के आरोप लगाए जाने के बाद अब मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अभय राज सिंह स्वयं पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर महिला के आरोपों को पूरी तरह निराधार, झूठा और साजिश का हिस्सा बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। गौरतलब है कि सोमवार को गाजियाबाद से रीवा पहुंची एक महिला ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि अभय राज सिंह ने स्वयं को केंद्रीय मंत्रियों और प्रभावशाली लोगों का रिश्तेदार बताते हुए उनके दिवंगत पति से केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं में साझेदारी और व्यवसायिक अवसर दिलाने के नाम पर लगभग 37 लाख 80 हजार रुपये लिए थे। महिला का यह भी आरोप था कि पति की मृत्यु के बाद भी उन्हें न तो धनराशि वापस की गई और न ही किसी प्रकार का काम दिलाया गया।

खुद फरियादी बनकर एसपी कार्यालय पहुंचे अभय राज सिंह

महिला के आरोपों के सार्वजनिक होने के एक दिन बाद अभय राज सिंह स्वयं पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और एक लिखित शिकायत प्रस्तुत करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप तथ्यहीन हैं और उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। अभय राज सिंह ने दावा किया कि उनका उक्त महिला या उसके परिवार के साथ किसी प्रकार का ऐसा वित्तीय लेन-देन नहीं है, जैसा आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उल्टा उनके छोटे भाई के लगभग 2 लाख 20 हजार रुपये महिला के परिवार पर बकाया हैं, जो आज तक वापस नहीं किए गए हैं।

"25 लाख रुपये लेकर बैठे हैं सतना के लोग"

अभय राज सिंह ने आरोप लगाया कि सतना निवासी एक परिवार ने उनसे लगभग 25 लाख 65 हजार रुपये लिए हैं। उन्होंने संबंधित व्यक्तियों के नाम लेते हुए कहा कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की, तब उनके खिलाफ दबाव बनाने और उन्हें बदनाम करने के लिए अन्य लोगों के माध्यम से शिकायतें कराई जा रही हैं। उनका कहना है कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा उन्हें कई बार धमकियां भी दी गई हैं और उनके पास व्हाट्सएप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा अन्य दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें वे जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।

"छह साल बाद आरोप लगाना संदेह पैदा करता है"

अभय राज सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनके द्वारा किसी प्रकार की ठगी की गई थी तो शिकायतकर्ता ने तत्काल कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि छह वर्ष बाद अचानक इतने गंभीर आरोप लगाए जाना स्वयं इस मामले को संदेह के घेरे में खड़ा करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका किसी केंद्रीय मंत्री अथवा राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर किसी से धनराशि लेने से कोई संबंध नहीं है। स्वयं को उन्होंने एक सामाजिक कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप राजनीतिक और व्यक्तिगत दुर्भावना से प्रेरित हैं।

पति की मृत्यु को लेकर भी दिया जवाब

महिला द्वारा उनके पति की मृत्यु को कथित आर्थिक और मानसिक तनाव से जोड़ने के आरोपों पर भी अभय राज सिंह ने अपनी सफाई दी। उन्होंने दावा किया कि महिला के पति की मृत्यु कोरोना संक्रमण के दौरान बुलंदशहर स्थित अस्पताल में उपचार के दौरान हुई थी और उस समय अस्पताल में भर्ती कराने में उन्होंने स्वयं सहायता की थी।

पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग

अभय राज सिंह ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य पाया जाता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन यदि शिकायत झूठी और साजिशन साबित होती है तो शिकायतकर्ताओं के विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल यह मामला आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। एक ओर गाजियाबाद निवासी महिला द्वारा लाखों रुपये की ठगी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर अभय राज सिंह स्वयं को पीड़ित बताते हुए साजिश का शिकार होने का दावा कर रहे हैं। अब पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच और उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


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