| 'सिंधु' पर संग्राम: भारत की एक चोट से कराह उठा पाकिस्तान, प्यास के डर से सड़कों पर उतरी फौज, दी जंग की गीदड़भभकी! |
इस्लामाबाद/नई दिल्ली - आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति बनाने वाले पाकिस्तान को भारत ने इस बार वहां चोट की है, जहां उसे सबसे ज्यादा दर्द होता है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले के बाद भारत ने दशकों पुराने 'सिंधु जल समझौते' (IWT) को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। नई दिल्ली के इस एक कड़े फैसले ने पूरे पाकिस्तान में हाहाकार मचा दिया है। पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने के डर से अब पाकिस्तानी हुक्मरान और आवाम सड़कों पर उतर आए हैं। हालत यह है कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में लोग 'सिंधु नदी' का नाम लेकर मरने-मारने की कसमें खा रहे हैं।
सड़कों पर उबला पाकिस्तान, 'मर जाएंगे पर सिंधु नहीं छोड़ेंगे' पाकिस्तानी मीडिया और अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने इस फैसले के खिलाफ सिंध प्रांत में एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। कराची, हैदराबाद, थार, मीरपुरखास, लरकाना, शिकारपुर और दाडू जैसे कई शहरों में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। बदहवास प्रदर्शनकारी सड़कों पर नारे लगा रहे हैं कि 'मर जाएंगे, लेकिन सिंधु पर अपना दावा नहीं छोड़ेंगे।' पीपीपी के प्रांतीय प्रमुख निसार अहमद खुहरो ने तो अब इस मुद्दे को लेकर हर गांव के लोगों को भड़काने और बिलावल भुट्टो को इसी बहाने प्रधानमंत्री बनाने का सियासी दांव भी खेल दिया है।
शांति का चोला... और फिर युद्ध की गीदड़भभकी पाकिस्तान के भीतर डर इस कदर बैठ गया है कि वहां के नेता अब सीधे युद्ध की धमकियां देने पर उतर आए हैं। सिंध सरकार के मंत्री सईद घनी ने सिंधु नदी को पाकिस्तान की 'लाइफलाइन' बताते हुए कहा कि अगर भारत ने पानी रोका तो पाकिस्तानी शांत नहीं बैठेंगे। उन्होंने पहले तो खुद को शांतिप्रिय बताते हुए कहा कि वे युद्ध नहीं चाहते, लेकिन तुरंत ही अपनी औकात पर आते हुए गीदड़भभकी दे डाली कि अगर उन्हें पानी और भोजन नहीं मिला, तो फिर युद्ध के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
भारत की दो टूक: आतंक बंद करो, वरना बूंद-बूंद को तरसोगे पाकिस्तानी हुक्मरानों की इस छटपटाहट और धमकियों का भारत पर रत्ती भर भी असर नहीं हुआ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ शब्दों में पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा है कि सिंधु जल संधि पर भारत का रुख पूरी तरह अडिग है। भारत ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय रूप से बंद नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित ही रहेगी। साफ है कि भारत ने अब 'बातों' के बजाय 'एक्शन' की नीति अपना ली है। बंदूक और पानी अब एक साथ नहीं बह सकते, और यह बात पाकिस्तान को बहुत अच्छे से समझ आ गई है।