बाढ आपदा प्रबंधन: तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित

बाढ आपदा प्रबंधन: तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित 

श्योपुर - कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा के निर्देशानुसार कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बाढ आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीईओ जिला पंचायत श्रीमती सौम्या आनंद ने कहा कि जल संसाधन विभाग द्वारा चंबल, पार्वती सहित जिले की अन्य प्रमुख नदियों एवं बांधो के जलस्तर की जानकारी प्रतिदिन दी जायेगी। उन्होने कहा कि बचाव एवं राहत कार्यो के लिए समुचित प्रबंध सुनिश्चित किये जायें तथा होमगार्ड विभाग द्वारा टीमों को सर्तक रखा जायें। उन्होंने निर्देश दिये कि संबंधित सभी विभाग बाढ राहत के संबंध में एक्शन प्लान भू-अभिलेख शाखा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। बैठक में डिप्टी कलेक्टर श्री संजय जैन एवं श्री विजय शाक्य सहित होमगार्ड, पीडब्ल्यूडी, पीएमजीएसवाय, पीएचई, स्वास्थ्य, पशुपालन, फूड, जल संसाधन, शिक्षा, खनिज, नगरपालिका, परिवहन, बीएसएनएल, बिजली आदि विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। 

सीईओ जिला पंचायत श्रीमती सौम्या आनंद ने निर्देश दिये कि बाढ आपदा प्रबंधन के तहत पूर्व में आई बाढ एवं जल भराव की स्थिति के चलते जिले के 60 ग्राम संवेदनशील के रूप में चिन्हित किये गये है, इन ग्रामों में कोटवार सहित स्थानीय अमले का सर्तकता बरतने तथा आवश्यकता के समय जिला स्तर पर सूचना प्रदान करने हेतु निर्देशित किया जायें। इसके साथ ही उन्होने वर्षाकाल के दौरान जलभराव एवं बाढ आपदा की संभावना वाले क्षेत्रो में राहत शिविरों हेतु सुरक्षित स्थानों का चिन्हांकन किया जायें। पर्याप्त मात्रा में दवाओं के भण्डारण हेतु डिपो होल्डर बनाये जायें। 

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि सीएचसी स्तर पर पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित की जायें तथा चिन्हित 60 गांव में आंगनबाडी केन्द्रों पर आवश्यक दवाईयां उपलब्ध रखी जायें। परिवहन विभाग द्वारा सभी बस संचालको को निर्देश जारी किये जायें कि पुल और पुलियाओं पर पानी होने की स्थिति में पार न करें। कलेक्ट्रेट में संचालित जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष से प्राप्त सूचना के आधार पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जायें। 

उन्होने कहा कि बाढ़ एवं अन्य आपदाओं के समय कम्युनिकेशन कनेक्टीविटी बनी रहना चाहिए। किसी भी स्थिति में मोबाइल टावर बंद न हो, मोबाइल टावर कपंनियों के प्रतिनिधि यह सुनिश्चित करें कि अतिवर्षा, बाढ़ के समय मोबाइल नेंटवर्क चालू रहें। 08 घंटे बैट्ररी बैकअप के साथ ही जनरेटर की व्यवस्था रखी जायें। बाढ़ एवं अतिवर्षा के कारण बैटरियां खराब न हो, उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा जाना सुनिश्चित करे। उन्होने कहा कि राशन दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को पूर्व से ही आगामी 3 माह के राशन का एकमुश्त वितरण किया जा रहा है। उन्होने निर्देश दिये कि जिले के सभी जल स्त्रोतों का क्लोरीनिकेशन कराया जायें, खनिज विभाग द्वारा सुनिश्चित किया जायें कि खदानो के गढ्ढे के चारो ओर तार फेसिंग कर ली गई है, यदि कही पर फेसिंग क्षतिग्रस्त हुई है तो उसे ठीक किया जायें। 

बाढ आपदा प्रबंधन की तैयारियों के संबंध में आयोजित उक्त बैठक के दौरान पीएमजीएसवाय द्वारा जानकारी प्रदान की गई कि 64 पुलिया चिन्हित की गई है, जिन पर वर्षाकाल के दौरान पानी आने की संभावना रहती है, इन सभी पुलियाओं पर चेतावनी संकेतक लगाये गये है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने बताया कि जलमग्नीय पुलो पर बेरीकेट्स लगाने की तैयारियां कर ली गई है तथा प्रत्येक पुल पर खतरे की स्थिति में आवागमन रोकने हेतु कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। होमगार्ड विभाग ने बताया कि उनके पास पर्याप्त मात्रा में बचाव एवं राहत कार्यो के लिए उपकरण उपलब्ध है। विजयपुर में डीआरसी बनाया गया है, बिजली विभाग द्वारा बताया गया कि विधुत लाइनों के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में त्वरित संधारण हेतु 15 एजेंसियां हायर की गई है तथा 300 विधुत पोल रिजर्व में रखे गये है, सब डिवीजन स्तर पर 7 लोगों की टीम भी बनाई गई है तथा सब इंजीनियर स्तर पर कन्ट्रोलरूम बनाये गये है। पीएचई विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि क्लोरीनिकेशन का कार्य जारी है तथा अभी तक 600 जल स्त्रोतों का क्लोरीनिकेशन किया गया है, 500 फील्ड टेस्ट किट भी उपलब्ध हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि जिला स्तर पर रेस्पॉन्स टीम गठित की गई है, इसके अलावा ब्लॉक स्तर पर भी 5-5 सदस्यीय चिकित्सकीय टीम गठित की गई है। पशुपालन विभाग द्वारा बताया गया कि एफएमडी टीकाकरण शुरू कर दिया गया है तथा 3 लाख 65 हजार के लगभग पशुओं का टीकाकरण किया जायेगा, पशुपालको को समझाइश दी जा रही है कि बाढ की स्थिति में अपने पशुओं को बांधकर न रखे, बल्कि उन्हें ऐसी स्थिति में खोल दिया जायें। नगरपालिका द्वारा बताया गया कि श्योपुर शहर में नालो की सफाई चल रही है, सीप नदी से सटी बस्तियों में सर्तकता के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है तथा राहत शिविर के लिए 8 स्थान चिन्हित किये गये है। नगरपालिका में कन्ट्रोलरूम भी स्थापित किया गया है तथा स्थानीय तैराको की सूची बनाई गई है। 

आजतक 24 के प्रशासन से सवाल

1. हर साल मानसून से पहले बाढ़ आपदा प्रबंधन की बैठकें होती हैं और एक्शन प्लान भी तैयार किए जाते हैं, लेकिन पिछले वर्षों में जिन संवेदनशील गांवों में जान-माल का नुकसान हुआ, वहां की कमियों की समीक्षा रिपोर्ट क्या कहती है और इस बार उससे अलग क्या ठोस बदलाव किए गए हैं?

2. जिले के 60 गांवों को संवेदनशील घोषित किया गया है। क्या इन गांवों में रहने वाले लोगों के लिए समय रहते सुरक्षित पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक आवास की कोई स्पष्ट योजना भी तैयार की गई है, या फिर प्रशासन केवल बाढ़ आने के बाद राहत कार्यों पर ही निर्भर रहेगा?

3. प्रशासन ने सभी विभागों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं, लेकिन यदि अचानक बाढ़ की स्थिति में किसी विभाग की लापरवाही या समन्वय की कमी से जनहानि होती है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने का कोई स्पष्ट प्रावधान किया गया है?


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