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| निवाड़ी; 24 लाख की परियोजना ने बदली तस्वीर, किसानों को सिंचाई, पशुओं को पानी और ग्रामीणों को मिला रोजगार Aajtak24 News |
निवाड़ी - जल संकट और खेती की चुनौतियों से जूझ रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बिरौरा खेत गांव अब एक नई मिसाल बनकर उभरा है। जनपद पंचायत पृथ्वीपुर की ग्राम पंचायत बिरौरा खेत में निर्मित ‘अमृत सरोवर’ ने गांव की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। कभी पानी की कमी से परेशान रहने वाले इस क्षेत्र में अब हरियाली लौट रही है और किसानों के चेहरे पर उम्मीद की चमक दिखाई देने लगी है। ‘अमृत सरोवर निर्माण दुनार नाला’ परियोजना जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में प्रशासन की एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया। ग्राम पंचायत ने कार्यकारी एजेंसी के रूप में इसकी जिम्मेदारी संभाली और तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा कराया।
करीब 24.95 लाख रुपये की स्वीकृत राशि में से 24.92 लाख रुपये खर्च कर बनाए गए इस सरोवर का निर्माण 6 जून 2025 से शुरू हुआ था। परियोजना के दौरान गांव में 5130 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ, जिससे स्थानीय मजदूरों को गांव में ही काम मिला और पलायन की स्थिति में भी कमी आई। इस अमृत सरोवर की सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी जल संग्रहण क्षमता मानी जा रही है। वर्तमान में इसमें लगभग 35 से 40 हजार घनमीटर तक पानी संग्रहित हो रहा है। इसका सीधा लाभ 30 किसानों को मिल रहा है, जबकि 50 से अधिक किसान अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि अब सिंचाई के लिए उन्हें पूरी तरह बारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
परियोजना का लाभ केवल खेती तक सीमित नहीं है। वन क्षेत्र के समीप स्थित होने के कारण यह सरोवर अब निराश्रित पशुओं के लिए भी पानी का बड़ा स्रोत बन चुका है। गर्मी के मौसम में जहां पशुओं को पानी के लिए भटकना पड़ता था, वहीं अब उन्हें गांव के पास ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है। इसके अलावा सरोवर में मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलने लगा है। प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में यह परियोजना गांव की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बिरौरा खेत का यह अमृत सरोवर केवल जल संरक्षण परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मॉडल बनता दिखाई दे रहा है। यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शिता और सही सोच के साथ हो, तो वे गांवों की तकदीर बदल सकती हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अमृत सरोवर से किसानों को लाभ मिलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि पानी का वितरण सभी किसानों तक समान रूप से पहुंचे और बड़े किसानों का कब्जा न हो?
- परियोजना में लगभग पूरी स्वीकृत राशि खर्च हुई है, क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता और खर्च की पारदर्शिता की स्वतंत्र तकनीकी जांच भी कराई जाएगी?
- ग्रामीण क्षेत्रों में कई जल संरचनाएं कुछ वर्षों बाद उपेक्षा का शिकार हो जाती हैं, ऐसे में इस अमृत सरोवर के रखरखाव और दीर्घकालिक संरक्षण की जिम्मेदारी किसकी होगी?
