सिंधु जल विवाद पर बौखलाया पाकिस्तान, भारत को दी गीदड़भभकी– 'पानी रोका तो हाथ काट देंगे'

सिंधु जल विवाद पर बौखलाया पाकिस्तान, भारत को दी गीदड़भभकी– 'पानी रोका तो हाथ काट देंगे'

नई दिल्ली/इस्लामाबाद - भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को लेकर राजनयिक और रणनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा इस संधि को स्थगित (सस्पेंड) किए जाने से पाकिस्तान पूरी तरह छटपटा उठा है। इसी बौखलाहट के बीच पाकिस्तानी सरकार के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसद्दिक मलिक ने भारत को खुलेआम गीदड़भभकी देते हुए कहा है कि अगर किसी ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की, तो वे 'उन हाथों को काट देंगे'।

पाकिस्तानी मंत्रियों में विरोधाभास और छटपटाहट

इस्लामाबाद में सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुसद्दिक मलिक ने जहर उगला। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश का प्रधानमंत्री कह रहा है कि वह पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने देगा, लेकिन पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी की हर हाल में रक्षा करेगा। मलिक का यह हिंसक बयान पाकिस्तानी चैनल '24NewsHD' पर प्रसारित हुआ।

दिलचस्प बात यह है कि इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान सरकार का विरोधाभास भी सामने आया। जहाँ एक तरफ मुसद्दिक मलिक हाथ काटने की धमकी दे रहे थे, वहीं सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने दावा किया कि सिंधु जल संधि आज भी पूरी तरह लागू है और भारत इसे अकेले न तो खत्म कर सकता है और न ही बदल सकता है। तरार ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के मुताबिक पानी पाकिस्तान की 'लाइफलाइन' भी है और 'रेडलाइन' भी। इससे पहले पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दे चुके हैं।

दबाव बनाने के लिए पाक आयोजित कर रहा है अंतरराष्ट्रीय सेमिनार

भारत के कड़े रुख से घबराया पाकिस्तान अब इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश में जुट गया है। पाकिस्तान ने ऐलान किया है कि वह मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करने जा रहा है। इस सम्मेलन में कई विदेशी प्रतिनिधियों, कानूनी और जल विशेषज्ञों को बुलाया गया है ताकि संधि के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर भारत पर वैश्विक दबाव बनाया जा सके।

1960 की संधि और भारत का सख्त रुख

गौरतलब है कि वर्ष 1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में हुई इस संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज का पानी भारत को और सिंधु, झेलम व चिनाब का पानी पाकिस्तान को मिला था। यह संधि कई युद्धों के बाद भी चलती रही, लेकिन अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले ने भारत के सब्र का बांध तोड़ दिया। भारत ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक यह संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत के इस सख्त रवैये ने पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी है।

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