| 'मरम्मत' के दावों की खुली पोल! रीवा में मौत बनकर झूल रही 11 केवी लाइनें, बड़ा हादसा टला तो जागा सवाल—जिम्मेदार कब जागेंगे? |
रीवा - हर साल जून माह तक बिजली व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं। करोड़ों रुपये रखरखाव और मरम्मत पर खर्च होने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक जर्जर खंभे, झूलते तार, खुले विद्युत कनेक्शन और आबादी के बीच से गुजरती 11 केवी लाइनें आज भी लोगों की जान पर भारी पड़ रही हैं। 8 जुलाई 2026 की सुबह लगभग 8 बजे गढ़ क्षेत्र के नई गढ़ी रोड स्थित सेवा सहकारी समिति मर्यादित लवली गढ़ के सामने अचानक 11 केवी बिजली लाइन का तार टूटकर सड़क पर गिर गया। उस समय सड़क पर लोगों और वाहनों की आवाजाही थी। महज संयोग रहा कि कोई इसकी चपेट में नहीं आया। यदि कुछ सेकंड का भी अंतर होता तो यह घटना एक बड़े हादसे में बदल सकती थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। नई गढ़ी रोड सहित गढ़ क्षेत्र के कई हिस्सों में बिजली के तार आबादी के ऊपर से झूल रहे हैं। कई खंभे तिरछे हो चुके हैं, तो कहीं खुले तार मौत को खुला निमंत्रण देते दिखाई देते हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि गीली जमीन और पानी के संपर्क में आने से करंट फैलने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। कई गांवों में वर्षों पुराने विद्युत खंभे जर्जर अवस्था में खड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ खंभे इतने कमजोर हो चुके हैं कि हल्के दबाव में भी गिर सकते हैं। इसके बावजूद न तो समय पर मरम्मत हो रही है और न ही उन्हें बदला जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जून माह के भीतर संपूर्ण विद्युत व्यवस्था के रखरखाव का दावा किया जाता है, तो फिर जिलेभर में झूलते तार, जर्जर खंभे और असुरक्षित 11 केवी लाइनें आखिर क्यों दिखाई दे रही हैं? क्या रखरखाव का कार्य वास्तव में धरातल पर हुआ या केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित रहा? यदि कार्य हुआ तो किन क्षेत्रों में हुआ, किस एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से कराया गया और उस पर कितना खर्च हुआ—यह जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि 11 केवी लाइन का तार टूटकर सड़क पर गिरना अत्यंत गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में कुछ सेकंड की लापरवाही भी कई लोगों की जान ले सकती है। इसलिए पूरे जिले में उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराकर जर्जर लाइनों और खंभों को तत्काल बदले जाने की आवश्यकता है।
फिलहाल इस मामले में विद्युत विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। समाचार स्थानीय नागरिकों से प्राप्त जानकारी एवं घटनास्थल पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।