![]() |
| "मनगवां तहसील में 'हलकों' का खेल? पटवारियों पर सौदेबाजी के आरोप, जांच की उठी मांग", किसानों और अधिवक्ताओं ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग |
रीवा - जिले की तहसील मनगवा के राजस्व विभाग को लेकर किसानों और अधिवक्ताओं के बीच असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। तहसील मनगवा के अंतर्गत कार्यरत कुछ पटवारियों की पदस्थापना, राजस्व मामलों के निस्तारण तथा कथित सौदेबाजी को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि संबंधित पटवारी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया है।
मिली जानकारी के अनुसार, किसानों एवं अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसील मनगवा के अंतर्गत कुछ पटवारियों की "अच्छे हलकों" में पदस्थापना के लिए कथित रूप से सेवा शुल्क लिए जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ राजस्व कर्मचारी मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं, जिससे आम किसान और भूमिधर परेशान हैं तथा राजस्व संबंधी मामलों के निराकरण में अनावश्यक विलंब हो रहा है।
इसी क्रम में शिकायतकर्ता रजनी सोनी ने मंगलवार को आयोजित कलेक्टर जनसुनवाई में जिला कलेक्टर रीवा को लिखित शिकायत सौंपकर संबंधित पटवारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। शिकायत में राजस्व कार्यों में कथित अनियमितताओं और किसानों को हो रही परेशानियों का उल्लेख किया गया है। वही राजेश कुशवाहा, गुलाब सिंह आदि किसानो ने विभिन्न कार्यो के सबंध में सेवा शुक्ल की मांग का आरोप लगा है
वहीं, इस संबंध में गढ़ हल्का के पटवारी देवेंद्र से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने सभी आरोपों को निराधार और तथ्यहीन बताया। उनका कहना है कि वे शासन के नियमों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं तथा लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। इधर, अधिवक्ता संघ तहसील मनगवां के सचिव बृजेंद्र प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यदि राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो आम किसानों का प्रशासन पर से विश्वास कमजोर होगा। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है ताकि किसानों को न्याय मिल सके।
जानकारों का कहना है कि जिला कलेक्टर रीवा लगातार जनसुनवाई के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि निचले स्तर पर किसी प्रकार की अनियमितता या मनमानी होती है तो उसका सीधा असर शासन और जिला प्रशासन की छवि पर पड़ता है। सूत्रों के अनुसार, जिले में संचालित सीएम हेल्पलाइन (181) तथा कलेक्टर जनसुनवाई में प्राप्त होने वाले आवेदनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन का दरवाजा खटखटा रहे हैं। ऐसे में राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध एवं निष्पक्ष निराकरण प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
किसानों और अधिवक्ताओं ने मांग की है कि तहसील मनगवां में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए, वहीं यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं तो इसकी भी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए, जिससे तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके। यह समाचार शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और संबंधित पक्ष के जवाब पर आधारित है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या जांच का अंतिम निष्कर्ष संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही किया जाएगा। इस सबंध में अधिकारियो का पक्ष जानने का प्रयास किया गया किन्तु पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
