
रीवा जिले की गढ़ पंचायत बदहाल, विकास के नाम पर 'कागजी डामर' और प्रशासनिक चुप्पी
रीवा/गढ़ - रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गढ़ विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर दिखाई दे रही है। एक ओर सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं गढ़ के निवासी बुनियादी समस्याओं के दलदल में फंसकर कराह रहे हैं। वर्षों से भारतीय जनता पार्टी का गढ़ मानी जाने वाली इस पंचायत की जनता अब स्थानीय नेताओं और प्रशासन की उदासीनता से त्रस्त होकर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दे रही है।
सड़क नहीं, भ्रष्टाचार का दलदल
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के चार-लेन बनने के बाद मनगवां विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कटरा, सुहागी और बस्ती की पुरानी सड़कों की मरम्मत नदारद है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व और वर्तमान विधायकों के कार्यकाल में सड़कों के नाम पर सिर्फ कागजों में डामर बिछाया गया है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद, ये सड़कें एक महीने भी चलने लायक नहीं रहतीं। सरकारी धन की इस बंदरबांट पर अब तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ प्रकरण पंजीयन न होना, प्रशासन की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
अतिक्रमण ने छीनी जल निकासी
गढ़ पंचायत में सड़कों की दुर्दशा का एक बड़ा कारण अवैध अतिक्रमण है। बस्ती का गंदा पानी सड़कों पर गिराया जा रहा है, जिससे राहगीर और स्कूली छात्र नारकीय स्थिति में चलने को मजबूर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि सड़क के पूर्व और पश्चिम की अधिकांश जमीन शासकीय है, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड (खसरे) में आज तक इसे 'पटरी' के रूप में दर्ज नहीं किया गया है। अतिक्रमण के कारण नालियां बंद हो चुकी हैं, जिससे जल निकासी का रास्ता ही खत्म हो गया है।
सुविधाओं का केंद्र और प्रशासन की उपेक्षा
गढ़ क्षेत्र का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि यहाँ स्वतंत्रता-पूर्व से संचालित हायर सेकेंडरी स्कूल, वर्तमान आयुर्वेद औषधालय और प्राथमिक चिकित्सालय स्थित हैं। इसके साथ ही, यहाँ कई निजी व सरकारी स्कूल हैं। बुधवार और रविवार को यहाँ 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों के लिए बड़ी बाजार लगती है। इसके बावजूद, बदहाल सड़कें और जलभराव क्षेत्र की बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं।
जनता का आक्रोश: अब नहीं सहेगा गढ़
गढ़ के निवासियों ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने वर्षों से भारतीय जनता पार्टी को मनगवां विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक मत देकर अपना समर्थन दिया है। इसके बावजूद, समस्याओं का निराकरण तो दूर, जनप्रतिनिधि जनता के सवालों का सामना करने से भी बच रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अब भी प्रशासन की 'कुंभकर्णी निद्रा' नहीं टूटी, तो आने वाले समय में वे भाजपा के नेताओं को करारा और मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।