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| नियमों को ठेंगा: बनगवा-राजनगर नगर परिषद भवन का निर्माण दोबारा शुरू, ड्राइंग-डिजाइन पर उठ रहे गंभीर सवाल |
अनूपपुर - नगर परिषद बनगवा-राजनगर में निर्माणाधीन नगर परिषद कार्यालय भवन एक बार फिर भारी विवादों के केंद्र में आ गया है। आरोप है कि शासन के स्पष्ट नियमों और स्थानीय जनता की आपत्तियों को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए, बिना स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के ही निर्माण कार्य दोबारा चोरी-छिपे शुरू कर दिया गया है। इस पूरे मामले ने नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और सांठगांठ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भोपाल तक गूंजा था मामला, रुकवाया गया था काम
जानकारी के अनुसार, इस भवन निर्माण को लेकर पूर्व में स्थानीय पार्षदों एवं नगरवासियों द्वारा विधिवत शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। शिकायतों में स्पष्ट आरोप था कि भवन निर्माण कार्य बिना आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियों और ड्राइंग-डिजाइन के ही शुरू कर दिया गया था। मामला जब भोपाल (मुख्यालय) तक पहुंचा, तो विभागीय स्तर पर इस पर कड़ा संज्ञान लिया गया। संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब भी किया गया था, जिसके दबाव में आकर कुछ समय के लिए निर्माण कार्य को रोकना पड़ा था।
प्रशासनिक फेरबदल होते ही फिर शुरू हुआ 'खेल'
हैरानी की बात यह है कि जैसे ही प्रशासनिक परिस्थितियां बदलीं, नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और उपयंत्री (सब-इंजीनियर) ने बिना किसी सार्वजनिक जानकारी के और बिना ड्राइंग-डिजाइन की अंतिम स्वीकृति प्राप्त किए निर्माण कार्य पुनः शुरू करा दिया। जबकि नगरीय प्रशासन के नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि सक्षम स्तर से स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के बिना किसी भी शासकीय भवन का निर्माण कतई प्रारंभ नहीं किया जा सकता। ऐसे में बिना तकनीकी मंजूरी के हो रहा यह निर्माण सीधे तौर पर नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है।
800 नागरिकों और पार्षदों के विरोध को दबाया
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता का कहना है कि इस भवन के निर्माण स्थल (लोकेशन) को लेकर भी व्यापक विरोध दर्ज कराया गया था। नगर के लगभग 800 नागरिकों एवं कई पार्षदों ने लिखित रूप से मांग की थी कि भवन का निर्माण किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर कराया जाए ताकि भविष्य में जनता को परेशानी न हो। लेकिन जनता की इस जायज मांग को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आरोप है कि जनता की आवाज को दबाकर और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए निर्माण कार्य को जल्दबाजी में आगे बढ़ाया जा रहा है।
जनता पूछ रही सवाल: क्या मूकदर्शक बना रहेगा प्रशासन? स्थानीय नगरवासियों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा की गई लिखित शिकायतों, पार्षदों के सीधे विरोध और विभागीय नोटिसों के बाद भी इस अवैध प्रक्रिया पर कार्रवाई नहीं होती है, तो यह साफ संदेश होगा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज का कोई महत्व नहीं रह गया है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इन बेलगाम जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर वे भी मूकदर्शक बनकर नियमों की खुलेआम हो रही इस अनदेखी को देखते रहेंगे।
