राजनांदगांव; लोन तो दिया, लेकिन वापसी क्यों अटक रही? SHG बैंकिंग सिस्टम पर बड़ा मंथन Aajtak24 News

राजनांदगांव; लोन तो दिया, लेकिन वापसी क्यों अटक रही? SHG बैंकिंग सिस्टम पर बड़ा मंथन Aajtak24 News

राजनांदगांव - छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान – NRLM) के तहत स्व-सहायता समूहों (SHG) के बैंक लिंकेज में बढ़ते नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) को लेकर जिला पंचायत सभाकक्ष में महत्वपूर्ण जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य फोकस समूहों के ऋण वितरण, उनकी वसूली व्यवस्था और वित्तीय समावेशन को अधिक प्रभावी बनाना रहा। बैठक में जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह, राज्य कार्यक्रम प्रबंधक श्री आशुतोष कुमार सिंह और सहायक राज्य कार्यक्रम प्रबंधक श्री संतोष कुमार शर्मा सहित बैंकिंग व मिशन से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे।

एनपीए पर बढ़ती चिंता, रिकवरी सिस्टम पर जोर

बैठक में बताया गया कि स्व-सहायता समूहों के बैंक लिंकेज खातों में एनपीए की स्थिति में वृद्धि देखी जा रही है, जिसे गंभीरता से लेते हुए इसके निराकरण पर विशेष रणनीति पर चर्चा की गई।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि—

  • ऋण वितरण के बाद नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है
  • समूहों की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना होगा
  • और सीबीआरएम समिति (Community Based Repayment Mechanism) को सक्रिय कर वसूली प्रणाली को सशक्त बनाना होगा

वित्तीय समावेशन पर भी हुआ फोकस

बैठक में यह भी बताया गया कि स्व-सहायता समूहों को केवल ऋण देना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें—

  • इंटरप्राइज फाइनेंस
  • बीमा योजनाएं
  • और सतत आजीविका गतिविधियों से जोड़ना भी जरूरी है

इस दिशा में बैंक, मिशन और फील्ड स्तर के कार्यकर्ताओं को बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गए।

बैंक शाखाओं का किया गया निरीक्षण

बैठक के बाद राज्य स्तरीय अधिकारियों ने जिले की विभिन्न बैंक शाखाओं का दौरा भी किया। इस दौरान बैंक मैनेजरों और स्टाफ के साथ SHG लोन प्रकरणों की स्थिति पर चर्चा की गई।

अधिकारियों ने भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार SHG ऋण मामलों में—

  • समयबद्ध कार्रवाई
  • रिकवरी में सक्रियता
  • और समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए

90 प्रतिभागियों की सहभागिता

इस बैठक में जिला, ब्लॉक और बैंकिंग स्तर के लगभग 90 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें बीपीएम, क्षेत्रीय समन्वयक, पीआरपी, एफएलसीआरपी और बैंक मित्र शामिल रहे।

बैठक में साफ संकेत दिए गए कि अब SHG बैंकिंग सिस्टम को केवल ऋण वितरण मॉडल नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन और सतत आजीविका मॉडल के रूप में विकसित करना होगा, ताकि बढ़ते एनपीए को नियंत्रित किया जा सके और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. लगातार बढ़ते एनपीए के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी—बैंकिंग सिस्टम की या फील्ड लेवल SHG प्रबंधन की?
  2. क्या ऋण वितरण से पहले समूहों की वास्तविक आर्थिक क्षमता का आकलन पर्याप्त रूप से किया जा रहा है या सिर्फ लक्ष्य पूरा करने के लिए लोन दिए जा रहे हैं?
  3. सीबीआरएम जैसी समितियां कितनी प्रभावी साबित हुई हैं, और क्या इनके जरिए वास्तविक रिकवरी प्रतिशत में सुधार दर्ज हुआ है?

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