| कागज़ों से निकलकर पहाड़ों तक पहुंचा सुशासन: कलेक्टर-एसपी ने मोटरसाइकिल से दुर्गम गांवों में लगाई चौपाल Aajtak24 News |
सुकमा - जिले में सुशासन तिहार 2026 के तहत प्रशासनिक व्यवस्था का एक बिल्कुल अलग और जमीनी चेहरा देखने को मिला, जब कलेक्टर श्री अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण मोटरसाइकिल पर सवार होकर दुर्गम पहाड़ी और जंगलों से घिरे गांव गोंडेरास और नीलावाया पहुंचे। लगभग 30 किलोमीटर तक उबड़-खाबड़ और कठिन रास्तों को पार कर दोनों अधिकारियों ने सीधे गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से चौपाल लगाई और उनकी समस्याएं सुनीं।
गोंडेरास गांव में दोनों अधिकारी इमली के पेड़ के नीचे खाट पर बैठकर ग्रामीणों से रूबरू हुए। इस दौरान ग्रामीणों ने बिजली, पानी, आवास और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं रखीं। गांव में खराब सौर प्लेटों की शिकायत पर कलेक्टर ने मौके पर ही क्रेड़ा विभाग को सभी घरों की सौर प्रणाली तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने बताया कि गोंडेरास में आंगनबाड़ी भवन, पंचायत भवन सहित करीब 60 से 70 लाख रुपये के विकास कार्य पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनकी जिम्मेदारी पंचायत को दी गई है ताकि कार्य में तेजी लाई जा सके।
चौपाल के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना, आधार कार्ड, बैंक खाता और तेंदूपत्ता खरीदी जैसी योजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई। इसी दौरान ग्रामीणों को मौके पर ही लाभ दिया गया, जिसमें 17 केसीसी कार्ड, 11 पीएम किसान प्रकरण, 12 जाति प्रमाण पत्र, 2 किसान किताब और 2 पटवारी प्रतिवेदन शामिल रहे। गांव के सरपंच ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पहली बार कोई कलेक्टर इतनी कठिन राह तय कर गांव तक पहुंचे हैं।
इसके बाद कलेक्टर और एसपी नीलावाया पहुंचे, जहां उन्होंने फिर जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। यहां ग्रामीणों ने बारिश के दौरान नाले के कारण 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने की समस्या बताई। इस पर कलेक्टर ने तत्काल पुल निर्माण की स्वीकृति देने के निर्देश जारी किए।
नीलावाया में स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने सुरक्षित प्रसव, मोतियाबिंद मरीजों के इलाज और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आवश्यक निर्देश दिए। शिविर में 22 जन्म प्रमाण पत्र तत्काल वितरित किए गए और 2 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई भी की गई।
कलेक्टर का बयान
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने कहा कि शासन की मंशा है कि विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि दोनों गांवों में लगभग 70 लाख रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं और ‘नियद नेल्लानार’ अभियान के तहत बिजली, पानी, स्वास्थ्य और योजनाओं का पूर्ण सेच्युरेशन लक्ष्य रखा गया है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 70 लाख रुपये की स्वीकृत योजनाएं कितने समय में पूरी होंगी और उनकी वास्तविक प्रगति की निगरानी कौन करेगा?
- क्या केवल चौपाल और त्वरित निर्देशों से दूरस्थ गांवों की स्थायी समस्याएं (सड़क, स्वास्थ्य, बिजली) लंबे समय तक हल हो पाएंगी?
- जिन योजनाओं का मौके पर लाभ दिखाया गया, क्या उनका फॉलो-अप और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए कोई नियमित मॉनिटरिंग सिस्टम मौजूद है?