बालोद; 402 आवेदन, 86 का मौके पर निपटारा… फिर भी गांव में उठी एक ही आवाज Aajtak24 News

बालोद; 402 आवेदन, 86 का मौके पर निपटारा… फिर भी गांव में उठी एक ही आवाज Aajtak24 News

बालोद - सुशासन तिहार 2026 के तहत बालोद जिले के आदिवासी बहुल डौण्डी विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम नर्राटोला में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों की भारी भीड़ देखने को मिली। आसपास की 17 ग्राम पंचायतों से पहुंचे लोगों ने अपनी समस्याएं और मांगें प्रशासन के सामने रखीं, जिससे पूरा परिसर दिनभर जनसंवाद का केंद्र बना रहा।

शिविर में कुल 402 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 86 आवेदनों का मौके पर निराकरण किया गया, जबकि शेष आवेदनों पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई जारी है।

योजनाओं का लाभ मौके पर मिला, लेकिन समस्याएं भी सामने आईं

शिविर में ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं के तहत तत्काल लाभ प्रदान किया गया—

  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पूर्ण आवास प्रमाण पत्र
  • श्रम कार्ड वितरण
  • मछली पालन योजना के तहत जाल वितरण
  • स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय प्रोत्साहन राशि
  • दिव्यांगजनों को छड़ी और श्रवण यंत्र
  • सामाजिक पेंशन स्वीकृति पत्र
  • किसानों को डिजिटल किसान किताब और राशन कार्ड

इसके अलावा मेडिकल बोर्ड के माध्यम से 2 दिव्यांगजनों के प्रमाण पत्र मौके पर ही बनाए गए

बच्चों और माताओं के लिए विशेष पहल

शिविर में मानवीय पहल भी देखने को मिली—

  • बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार
  • गर्भवती माताओं की गोदभराई
  • स्कूली विद्यार्थियों का सम्मान (10वीं-12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन)

प्रशासन का दावा: हर आवेदन पर होगी कार्रवाई

अपर कलेक्टर श्री अजय किशोर लकरा ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य प्रशासन को जनता के बीच लाना और समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि प्राप्त सभी आवेदनों के निराकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जनपद अध्यक्ष श्री मुकेश कौड़ो ने कहा कि यह अभियान शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर रहा है, जिससे योजनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ रही है।

शिविर का आंकड़ा एक नजर में

  • कुल आवेदन: 402
  • मौके पर निराकरण: 86
  • शामिल ग्राम पंचायतें: 17
  • विभागीय स्टॉल: अनेक (राजस्व, पंचायत, कृषि, शिक्षा, विद्युत आदि)

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 402 में से सिर्फ 86 आवेदनों का ही मौके पर निराकरण क्यों हो पाया—क्या सिस्टम की क्षमता कम है या प्रक्रियाएं अत्यधिक जटिल?
  2. शेष आवेदनों के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा तय क्यों नहीं की गई, जिससे लोगों को बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें?
  3. क्या सुशासन तिहार के बाद भी इन आवेदनों की नियमित मॉनिटरिंग का कोई ठोस मैकेनिज्म मौजूद है या मामला शिविर खत्म होते ही धीमा पड़ जाता है?

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