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| सीहोर; बरगी हादसे के बाद नर्मदा घाटों पर हाई अलर्ट! SDM ने नाव घाट पहुंचकर दी सख्त चेतावनी Aajtak24 News |
सीहोर- बरगी क्रूज़ हादसे के बाद अब प्रशासन नर्मदा घाटों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलर्ट मोड में दिखाई दे रहा है। सीहोर जिले के भैरूंदा एसडीएम सुधीर कुशवाह ने नर्मदा बाबरी नाव घाट का निरीक्षण कर नाव संचालन व्यवस्था का जायजा लिया और ठेकेदारों को सख्त निर्देश जारी किए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसडीएम ने नाव संचालन के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नाव में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी यात्रियों को अनिवार्य रूप से लाइफ जैकेट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
निरीक्षण के दौरान नावों की तकनीकी स्थिति पर भी फोकस किया गया। एसडीएम ने कहा कि नाव संचालन से पहले नियमित तकनीकी जांच जरूरी है और केवल अनुभवी नाविकों को ही संचालन की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उन्होंने घाट पर सुरक्षा बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक और सूचना बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए, ताकि यात्रियों को संभावित जोखिमों की जानकारी पहले से मिल सके। बरगी हादसे के बाद प्रशासन अब किसी भी प्रकार की लापरवाही के मूड में नहीं दिख रहा। एसडीएम ने साफ चेतावनी दी कि यदि सुरक्षा मानकों में किसी तरह की कमी या नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से कई घाटों पर सुरक्षा व्यवस्थाएं केवल औपचारिकता बनकर रह गई थीं। ऐसे में बड़े हादसे के बाद प्रशासनिक सक्रियता को जरूरी कदम माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह सख्ती केवल निरीक्षण तक सीमित रहती है या वास्तव में घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार दिखाई देता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल
- बरगी हादसे के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है, तो क्या इससे पहले नाव घाटों पर सुरक्षा मानकों की नियमित जांच केवल कागजों तक सीमित थी?
- जिले के कितने नाव घाटों पर अभी भी लाइफ जैकेट, प्रशिक्षित नाविक और तकनीकी जांच जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं?
- यदि भविष्य में किसी नाव हादसे में लापरवाही सामने आती है, तो क्या कार्रवाई केवल ठेकेदारों तक सीमित रहेगी या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी?
