झाबुआ; उद्योगों का गंदा खेल आया सामने! आधा खाली पड़ा ट्रीटमेंट प्लांट, कलेक्टर ने मांगा जवाब

झाबुआ; उद्योगों का गंदा खेल आया सामने! आधा खाली पड़ा ट्रीटमेंट प्लांट, कलेक्टर ने मांगा जवाब

झाबुआ - जिले के मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र में संचालित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की वास्तविक स्थिति उस समय सामने आई जब कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने प्लांट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पता चला कि पर्याप्त मात्रा में औद्योगिक अपशिष्ट (एफ्लुएंट) नहीं मिलने के कारण प्लांट का नियमित संचालन प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कलेक्टर को बताया कि प्लांट की क्षमता के लगभग 50 प्रतिशत तक एफ्लुएंट मिलने पर ही ट्रीटमेंट प्रक्रिया प्रभावी तरीके से संचालित हो सकती है। लेकिन 24 अप्रैल 2026 के बाद से पर्याप्त मात्रा में एफ्लुएंट नहीं पहुंचने के कारण प्लांट में उपचार कार्य बंद जैसी स्थिति में है।

कलेक्टर डॉ. भरसट ने एमपीआईडीसी के सहायक अभियंता को निर्देश दिए कि औद्योगिक इकाइयों को नियमित रूप से अपना एफ्लुएंट सीईटीपी तक भेजने के लिए बाध्य किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो उद्योग निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जाएं और जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई भी की जाए।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने प्लांट की संचालन व्यवस्था, तकनीकी प्रक्रिया और पर्यावरणीय मानकों की जानकारी भी ली। प्रशासन का कहना है कि औद्योगिक अपशिष्ट का सही उपचार न होने पर पर्यावरण और आसपास के जल स्रोतों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए सीईटीपी का नियमित संचालन बेहद जरूरी है।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि कई उद्योग लागत बचाने के लिए अपशिष्ट को ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजने में लापरवाही बरतते हैं। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई औद्योगिक इकाइयों के लिए चेतावनी मानी जा रही है। निरीक्षण के दौरान सहायक कलेक्टर आयुषी बंसल, एसडीएम अवनधती प्रधान, नगर पालिका अधिकारी राहुल वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल

  1. यदि औद्योगिक इकाइयां नियमित रूप से एफ्लुएंट सीईटीपी तक नहीं भेज रहीं, तो क्या प्रशासन यह माने कि लंबे समय से पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही थी?
  2. जिन उद्योगों ने अपशिष्ट ट्रीटमेंट नियमों का पालन नहीं किया, क्या उनके खिलाफ सिर्फ नोटिस जारी होंगे या उत्पादन बंद करने जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी?
  3. क्या प्रशासन के पास ऐसा कोई स्वतंत्र मॉनिटरिंग सिस्टम है जिससे यह पता लगाया जा सके कि औद्योगिक अपशिष्ट वास्तव में ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच रहा है या सीधे नालों और जल स्रोतों में छोड़ा जा रहा है?

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