मुरैना; सिर्फ किताबों तक नहीं… अब जिंदगी बचाने की सीख! NCC कैडेट्स को बताया गया HIV का सच Aajtak24 News

सिर्फ किताबों तक नहीं… अब जिंदगी बचाने की सीख! NCC कैडेट्स को बताया गया HIV का सच Aajtak24 News

मुरैना - जिले के जौरा में छात्रों को स्वास्थ्य और एचआईवी एड्स के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिविल हॉस्पिटल जौरा के मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरएस सेमिल के मार्गदर्शन में आईसीटीसी जौरा द्वारा शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के एनसीसी कैडेट्स को एचआईवी एड्स से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को संक्रमण, बचाव और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के प्रति संवेदनशील बनाना था।

कार्यक्रम के तहत कक्षा दसवीं के छात्र-छात्राओं को आईसीटीसी केंद्र का भ्रमण कराया गया। इस दौरान एनसीसी प्रभारी शिक्षक रामकुमार गौड़ भी मौजूद रहे। आईसीटीसी काउंसलर संदीप सेंगर ने छात्रों को केंद्र की कार्यप्रणाली समझाते हुए एचआईवी संक्रमण के प्रमुख कारणों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जागरूकता और सतर्कता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा माध्यम है।

काउंसलर ने छात्रों को संक्रमण से बचने के उपाय, सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवहार और समय पर जांच की आवश्यकता के बारे में भी समझाया। इसके साथ ही एसटीआई और गुप्त रोगों से संबंधित परामर्श सेवाओं की जानकारी दी गई। छात्रों को बताया गया कि एचआईवी संक्रमित मरीजों को एआरटी सेंटर के माध्यम से नियमित दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।

कार्यक्रम में छात्रों को यह भी बताया गया कि एचआईवी एड्स से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या परामर्श के लिए टोल फ्री नंबर 1097 पर संपर्क किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया गया यह अभियान युवाओं में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

आज तक 24 न्यूज़ के सवाल

  1. स्कूलों में एचआईवी जागरूकता कार्यक्रम तो कराए जा रहे हैं, लेकिन क्या जिले के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में किशोरों तक ऐसी जानकारी नियमित रूप से पहुंच पा रही है, या अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गया है?
  2. जिले में एचआईवी संक्रमित मरीजों की वर्तमान संख्या क्या है, और क्या स्वास्थ्य विभाग के पास यह आंकड़ा है कि कितने मरीज समय पर उपचार न मिलने या सामाजिक डर के कारण इलाज से दूर हैं?
  3. सरकार जागरूकता की बात करती है, लेकिन क्या सरकारी अस्पतालों में एचआईवी और गुप्त रोगों से जुड़े मरीजों की गोपनीयता और सम्मान की पूरी गारंटी वास्तव में जमीन पर सुनिश्चित हो पा रही है?

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