एक मई से 30 मई तक चलने वाले इस अभियान के दौरान प्रगणक घर-घर जाकर मकानों का सूचीकरण करेंगे। इस दौरान भवन क्रमांक अंकित किए जाएंगे और परिवारों से संबंधित आवश्यक जानकारियां जुटाई जाएंगी। जनगणना के पहले चरण में मकान की संरचना, परिवार के सदस्यों की संख्या, पेयजल, बिजली, शौचालय, रसोई गैस, वाहन और अन्य सुविधाओं से जुड़ा डेटा एकत्र किया जाएगा। प्रशासन इस बार डिजिटल तकनीक पर विशेष फोकस कर रहा है। भवनों की जियो-टैगिंग और डिजिटल मैपिंग के जरिए आंकड़ों को अधिक सटीक और वैज्ञानिक बनाने की कोशिश की जा रही है। शुक्रवार को जनगणना 2027 के तहत एचएलबी भ्रमण भी किया गया। ग्राम खारपा में नियुक्त जनगणना कर्मियों ने मकानों का नक्शा तैयार कर सूचीकरण प्रक्रिया की शुरुआत की।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कार्य में पूरा सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि जिले की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का वास्तविक आकलन किया जा सके। प्रशासन का दावा है कि जनसहभागिता के जरिए हरदा जिला इस अभियान में प्रदेश के लिए मॉडल बन सकता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जनगणना को पूरी तरह डिजिटल और जियो-टैगिंग आधारित बताया जा रहा है, तो क्या प्रशासन के पास यह गारंटी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी त्रुटियों या नेटवर्क समस्या के कारण कोई परिवार आंकड़ों से बाहर नहीं रह जाएगा?
- क्या जनगणना कर्मचारियों को डेटा गोपनीयता और नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, क्योंकि इस बार घरों की डिजिटल मैपिंग और विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जा रही है?
- पिछली जनगणनाओं में कई गरीब और अस्थायी बस्तियों के लोग सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रह गए थे, तो इस बार प्रशासन ऐसे छूटे हुए परिवारों और प्रवासी मजदूरों को शामिल करने के लिए क्या अलग व्यवस्था कर रहा है?
