बेमेतरा; DMFT बैठक में सख्त मंत्री का संदेश—‘देरी नहीं, गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं Aajtak24 News

बेमेतरा; DMFT बैठक में सख्त मंत्री का संदेश—‘देरी नहीं, गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं Aajtak24 News

बेमेतरा - कलेक्टरेट के दिशा सभाकक्ष में मंगलवार को जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) शासी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने की। बैठक में साजा विधायक ईश्वर साहू सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में जिले में खनिज न्यास निधि से संचालित विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री बघेल ने सभी निर्माण कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों में देरी सीधे तौर पर जनता के हितों को प्रभावित करती है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए चेतावनी दी कि यदि किसी भी परियोजना में गुणवत्ता से समझौता पाया गया तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने पर विशेष चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि खनिज प्रभावित क्षेत्रों के लोगों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचना चाहिए, ताकि उनके जीवन स्तर में ठोस सुधार हो सके।

मंत्री बघेल ने अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड विजिट करने और कार्यों की प्रगति का स्थल निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का वास्तविक उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है, इसलिए निगरानी में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। बैठक में पारदर्शिता, जवाबदेही और संसाधनों के सही उपयोग पर भी जोर दिया गया। साथ ही सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई, पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण साहू, जिला पंचायत सीईओ सुश्री प्रेमलता पद्माकर, जिला खनिज अधिकारी रोहित साहू सहित अन्य अधिकारी एवं शासी परिषद के सदस्य उपस्थित रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. DMFT निधि से चल रहे प्रोजेक्ट्स में देरी और गुणवत्ता की शिकायतें बार-बार क्यों सामने आती हैं—क्या मॉनिटरिंग सिस्टम कमजोर है?
  2. क्या फील्ड विजिट बढ़ाने से वास्तव में भ्रष्टाचार और लापरवाही पर रोक लगेगी, या यह सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता है?
  3. खनिज प्रभावित क्षेत्रों में योजनाओं का लाभ “अंतिम व्यक्ति तक” पहुंचाने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका मूल्यांकन कौन और कैसे कर रहा है?

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