| बालोद में सुशासन तिहार की गूंज: दो शिविर, हजारों समस्याओं का निपटारा, लेकिन प्रशासनिक मॉडल पर उठते सवाल भी गहराए Aajtak24 News |
बालोद - जिले में सुशासन तिहार 2026 के तहत जनसमस्या निवारण शिविरों ने एक बार फिर प्रशासन की सक्रियता और जनता से सीधे संवाद का बड़ा उदाहरण पेश किया। बालोद विकासखण्ड के ग्राम खपरी और दल्लीराजहरा में आयोजित इन शिविरों में ग्रामीणों और शहरी नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां हजारों आवेदन दर्ज हुए और बड़ी संख्या में उनका मौके पर निराकरण किया गया।
ग्राम खपरी के हाई स्कूल मैदान में आयोजित मुख्य शिविर में 20 ग्राम पंचायतों के नागरिक शामिल हुए। वहीं दल्लीराजहरा नगर पालिका कार्यालय परिसर में शहरी क्षेत्रों के नागरिकों ने अपनी समस्याएं रखीं।
आंकड़ों में शिविर की बड़ी तस्वीर
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ग्राम खपरी शिविर: कुल 4505 आवेदन प्राप्त
- 3938 आवेदनों का तत्काल निराकरण
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दल्लीराजहरा शिविर: कुल 501 आवेदन
- केवल 98 आवेदनों का निराकरण
शिविरों में पंचायत, राजस्व, खाद्य, श्रम, महिला एवं बाल विकास, कृषि, शिक्षा, जल संसाधन सहित कई विभागों के आवेदन निपटाए गए।
हितग्राहियों को मिला सीधा लाभ
शिविर के दौरान सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत कई हितग्राहियों को लाभ वितरित किया गया—
- राशन कार्ड
- मनरेगा जॉब कार्ड
- पीएम आवास पूर्णता प्रमाण पत्र
- मछली जाल और आइस बॉक्स
- श्रवण यंत्र और दिव्यांग सहायता उपकरण
- सुपोषण किट और स्वच्छता सामग्री
- बच्चों के जाति प्रमाण पत्र
गर्भवती महिलाओं का गोदभराई कार्यक्रम और कुपोषित बच्चों को पोषण किट वितरण भी किया गया।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का संदेश
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने सुशासन तिहार को जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद का माध्यम बताया।
कलेक्टर ने जहां योजनाओं के लाभ और पोर्टल आधारित प्रक्रियाओं की जानकारी दी, वहीं जल संकट, भूजल स्तर और कृषि पैटर्न में बदलाव जैसे विषयों पर भी चेतावनी दी।
पानी और खेती पर गंभीर चेतावनी
कलेक्टर ने घटते भूजल स्तर को लेकर चेताया और किसानों से ग्रीष्मकालीन धान के बजाय वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने की अपील की। साथ ही सोख्ता गड्ढा, जल संरचना निर्माण और जल संरक्षण पर जोर दिया गया।
सामाजिक संदेश भी दिया गया
शिविर में बाल विवाह को सामाजिक अपराध बताते हुए इसकी रोकथाम की शपथ भी दिलाई गई। साथ ही आयुष्मान योजना, वय वंदन कार्ड और एग्रीस्टेक पोर्टल जैसी डिजिटल योजनाओं के लिए लोगों को प्रेरित किया गया।\