नर्मदापुरम; अब जंगल का फैसला गांव करेगा!” CFRR प्रशिक्षण से बदलेगी वन अधिकारों की तस्वीर? Aajtak24 News

नर्मदापुरम; अब जंगल का फैसला गांव करेगा!” CFRR प्रशिक्षण से बदलेगी वन अधिकारों की तस्वीर? Aajtak24 News

नर्मदापुरम - जिले में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में प्रशासन ने बड़ी पहल शुरू की है। कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर कन्या शिक्षक परिसर पवारखेड़ा में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिले के विभिन्न छात्रावासों और आश्रमों के लगभग 65 अधीक्षकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर पर वनाधिकार कानून की समझ विकसित करना और समुदाय आधारित वन प्रबंधन को मजबूत बनाना रहा। प्रशिक्षण में अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया। प्रतिभागियों को CFRR दावा तैयार करने, ग्राम सभा की भूमिका, वनाधिकार समिति (FRC) के कार्य, नक्शा निर्माण, साक्ष्य संकलन और दावा सत्यापन जैसे विषयों पर जानकारी दी गई।

अधिकारियों ने बताया कि CFRR लागू होने के बाद ग्राम सभाएं केवल वन संरक्षण तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि वे लघु वनोपज प्रबंधन, जल स्रोत संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बेहतर ढंग से विकसित कर सकेंगी। इससे गांवों में आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और वन संरक्षण को सामुदायिक ताकत मिलेगी।

प्रशिक्षण के दौरान व्यावहारिक सत्र और समूह चर्चाएं भी आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों को सामुदायिक वन क्षेत्र के नक्शे तैयार करने, संसाधनों के उपयोग और संरक्षण योजनाओं की रूपरेखा बनाने का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और वन अधिकारों से जुड़े कई विषयों पर सवाल भी पूछे। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य विभाग नर्मदापुरम के सहायक आयुक्त विवेक नागवंशी, क्षेत्र संयोजक अधिकारी हर्षित कौरव और जिला समन्वयक दानवीर निंगवाल मौजूद रहे। 

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. नर्मदापुरम जिले में अब तक कितने गांवों को वास्तविक रूप से CFRR अधिकार मिले हैं और कितने दावे वर्षों से लंबित पड़े हैं?
  2. क्या प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि CFRR के नाम पर केवल कागजी प्रशिक्षण न हो, बल्कि ग्राम सभाओं को वन प्रबंधन में वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति भी मिले?
  3. जब कई ग्रामीण क्षेत्रों में वन सीमा और अधिकारों को लेकर विवाद हैं, तो प्रशासन इन संघर्षों और संभावित भ्रष्टाचार को रोकने के लिए क्या स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था बनाएगा?

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