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| MP कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए ₹2,381 करोड़ की योजना को मंजूरी |
भोपाल - मध्य प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने की दिशा में मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित हुई मंत्रि-परिषद की उच्च स्तरीय बैठक में वन विभाग के एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। कैबिनेट ने प्रदेश में 'प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलिफेंट' और वन क्षेत्रों से गांवों के विस्थापन व मुआवजे के लिए 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। सरकार का यह महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट सोलहवें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि के तहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक यानी आगामी 5 वर्षों के लिए पूरी तरह से लागू रहेगा।
वन्यजीवों की सुरक्षा और हैबीटेट सुधार पर खर्च होंगे ₹1,131.15 करोड़
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत कुल बजट में से एक हजार 131 करोड़ 15 लाख रुपये की राशि विशुद्ध रूप से वन्यप्राणी संरक्षण के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित प्रबंध योजनाओं के क्रियान्वयन पर खर्च की जाएगी। इसके तहत प्रदेश के प्रमुख अभयारण्यों और नेशनल पार्कों का कायाकल्प किया जाएगा।
प्रमुख क्षेत्र: इस योजना का मुख्य फोकस मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) और गांधीसागर अभयारण्य पर रहेगा।
प्रमुख कार्य: वन्यजीवों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए आधुनिक बुनियादी ढाँचे का निर्माण किया जाएगा। इसमें जंगलों के भीतर जल स्रोतों का विकास, वनों को आग से बचाने के लिए 'अग्नि सुरक्षा उपाय', वन मार्गों का रखरखाव और रेस्क्यू सामग्री की बड़े पैमाने पर खरीदी शामिल है।
हाथियों का विशेष प्रबंधन: इसके साथ ही, हाथियों के प्रबंधन और सुरक्षा के लिए विशेष कैंप बनाए जाएंगे, उनकी दवाइयों की व्यवस्था की जाएगी और हाथियों के लिए पौष्टिक भोजन की स्थायी व्यवस्था की जाएगी।
विस्थापन और मुआवजे के लिए ₹1,250 करोड़ का बड़ा प्रावधान
योजना का दूसरा और सबसे संवेदनशील हिस्सा संरक्षित वन क्षेत्रों में रह रहे ग्रामीणों के पुनर्वास से जुड़ा है, जिसके लिए एक हजार 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अक्सर देखा गया है कि घने जंगलों के बीच इंसानी दखल से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है, जिससे दोनों को नुकसान होता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए वन्यप्राणियों के संवेदनशील आवास स्थलों में बसे गांवों को स्वेच्छा से बाहर पुनर्वसित किया जाएगा।
इस प्रक्रिया के तहत, सरकार ग्रामीणों की अचल संपत्तियों (जमीन और मकान) का विधि अनुसार पूर्ण अधिग्रहण करेगी और उन्हें तय नियमों के मुताबिक उचित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज का नकद भुगतान तुरंत करेगी।
इन 94 गांवों में लागू होगी योजना
पुनर्वास और विस्थापन का यह वृहद कार्य प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्रों में किया जाना है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, यह पूरी योजना संजय टाइगर रिजर्व, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रातापानी टाइगर रिजर्व, ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाले कुल 94 चिन्हित गांवों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि इस योजना से जहां एक तरफ मध्य प्रदेश में 'टूरिज्म' और 'इको-सिस्टम' को नई मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ जंगलों के भीतर बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों को मुख्यधारा में आकर बेहतर जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
