भिण्ड; बारिश से पहले ‘जल युद्ध’ की तैयारी! खेत तालाबों में उतरे CEO

भिण्ड; बारिश से पहले ‘जल युद्ध’ की तैयारी! खेत तालाबों में उतरे CEO 

भिण्ड - वीरसिंह चौहान ने सोमवार को जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर जल संरक्षण और हरियाली से जुड़े कार्यों की जमीनी हकीकत परखने की कोशिश की। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चौहान ने ग्राम पुरा भीम नगर और ग्राम इंदुर्खी पहुंचकर खेत तालाबों एवं अमृत सरोवर तालाबों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने तालाबों की साफ-सफाई, किनारों पर हुए कटाव और जल संचयन व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बारिश शुरू होने से पहले सभी तालाबों की मरम्मत और सफाई का कार्य पूरा किया जाए ताकि अधिकतम वर्षा जल का संरक्षण किया जा सके।

सीईओ ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि तालाबों का समय रहते संरक्षण नहीं किया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है। निरीक्षण के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों को तालाबों की निगरानी बढ़ाने और तकनीकी खामियों को तत्काल दूर करने के निर्देश भी दिए गए। इसके बाद श्री चौहान ग्राम पंचायत असनेहट पहुंचे, जहां उन्होंने “मां की बगिया” का भ्रमण किया। यहां लगाए गए आंवला, नींबू, चीकू, आम और अमरूद के पौधों की स्थिति का अवलोकन किया गया। उन्होंने पौधों की देखरेख, सिंचाई व्यवस्था और संरक्षण उपायों की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्थानीय कृषक द्वारा उगाई गई भिंडी, तोरई, ग्वारफली, धनिया और बैंगन सहित विभिन्न सब्जी फसलों का भी जायजा लिया। किसानों से खेती की तकनीक, उत्पादन और बाजार व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। सीईओ ने किसानों को मिश्रित खेती और बागवानी को बढ़ावा देने की सलाह देते हुए कहा कि इससे किसानों की आय में वृद्धि संभव है। ग्रामीणों ने इस दौरान तालाबों के संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं और खेती से जुड़ी समस्याओं को भी अधिकारियों के सामने रखा। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और कृषि विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. हर साल बारिश से पहले तालाबों की सफाई और कटाव सुधार के निर्देश दिए जाते हैं, फिर भी कई तालाब मानसून के बाद टूट-फूट और गाद से भर जाते हैं। आखिर जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती?
  2. “अमृत सरोवर” और “मां की बगिया” जैसी योजनाओं पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन कई जगह पौधे सूख जाते हैं और तालाबों में पानी तक नहीं टिकता। क्या इन योजनाओं का कोई स्वतंत्र ऑडिट कराया जाएगा?
  3. किसानों से जैविक खेती और बागवानी बढ़ाने की बात तो की जाती है, लेकिन बाजार, उचित दाम और सिंचाई की स्थायी व्यवस्था नहीं होने से किसान परेशान हैं। प्रशासन इसके लिए ठोस रोडमैप कब तक देगा?

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