| जगदलपुर; बाजार चौक बना समाधान केंद्र: चिंगपाल शिविर में 14 गांवों की समस्याओं का मौके पर निपटारा Aajtak24 News |
जगदलपुर - जिले के दरभा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चिंगपाल के बाजार चौक में आयोजित सुशासन तिहार-2026 का जनसमस्या निवारण शिविर ग्रामीणों के लिए राहत और समाधान का बड़ा मंच बन गया। क्लस्टर स्तर पर आयोजित इस शिविर में चिंगपाल सहित लेंड्रा, नेगानार, कामानार, तिरथगढ़, कोटमसर और ककनार समेत 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। सुबह से ही बाजार चौक पर भीड़ और उत्साह का माहौल देखने को मिला, जहां विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी लोगों की समस्याएं सुनने और योजनाओं का लाभ देने के लिए मौजूद रहे। शिविर का शुभारंभ जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मानदई कश्यप, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सम्पती नाग और जनपद उपाध्यक्ष श्री हरी प्रसाद कश्यप सहित जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुआ।
शिविर में राजस्व विभाग द्वारा भूमि पट्टों का वितरण किया गया, जिससे कई ग्रामीणों को लंबे समय से लंबित जमीन संबंधी मामलों में राहत मिली। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों का उपचार कर निःशुल्क दवाइयां वितरित कीं, जिससे मौके पर ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। इसके अलावा राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड और श्रम पंजीयन जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का निर्माण और सुधार कार्य भी तेजी से किया गया। कई मामलों में आवेदन के तुरंत बाद समाधान मिलने से ग्रामीणों ने संतोष व्यक्त किया।
उद्यान विभाग द्वारा उन्नत किस्म के पौधे और बीज मिनीकिट वितरित किए गए, जबकि मत्स्य विभाग ने मछुआरों को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान की। शिक्षा विभाग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया, जिससे छात्रों में उत्साह देखा गया। शिविर में सीईओ जिला पंचायत श्री प्रतीक जैन और एसडीएम तोकापाल श्री शंकर लाल सिन्हा ने विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के शिविरों का उद्देश्य शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बीरेंद्र बहादुर सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 14 पंचायतों के शिविर में बड़ी संख्या में बुनियादी दस्तावेज और भूमि पट्टे वितरित किए गए—क्या यह माना जाए कि इन क्षेत्रों में पहले से ही जमीन और दस्तावेजीकरण से जुड़ी लंबित समस्याएं काफी गंभीर हैं?
- अगर राशन कार्ड, आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसी सुविधाएं शिविर में ही बन रही हैं, तो क्या सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था इन सेवाओं को नियमित रूप से उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है?
- लगातार शिविरों में मौके पर समाधान दिखाया जा रहा है, लेकिन क्या प्रशासन के पास ऐसा कोई डेटा है जो यह साबित करे कि इन समाधान की स्थायित्व और दीर्घकालिक प्रभाव वास्तव में कितना सफल रहा है?