शिवपुरी; खाद की कालाबाजारी पर कलेक्टर का हंटर! बोले- किसानों का हक खाया तो होगी सख्त कार्रवाई

शिवपुरी; खाद की कालाबाजारी पर कलेक्टर का हंटर! बोले- किसानों का हक खाया तो होगी सख्त कार्रवाई

शिवपुरी - खरीफ सीजन से पहले जिले में उर्वरकों की उपलब्धता और कालाबाजारी रोकने को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने उर्वरक वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसानों के लिए निर्धारित खाद की कालाबाजारी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि किसी एक डीलर के पास जरूरत से ज्यादा स्टॉक नहीं रहना चाहिए और सभी डीलर्स को संतुलित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके। कलेक्टर श्री वर्मा ने कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, मार्कफेड और कोऑपरेटिव बैंक के अधिकारियों के साथ बैठक में निर्देश दिए कि जिले में कहीं भी अवैध रूप से खाद का भंडारण नहीं होना चाहिए। यदि किसी व्यापारी द्वारा जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा किया जाता है या किसानों को खाद उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता प्रभावित हो रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है और उत्पादन की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। इसी को देखते हुए किसानों को एनपीके उर्वरक के संतुलित उपयोग की सलाह दी गई है। कृषि विभाग द्वारा जिले में विशेष अभियान चलाकर किसानों को मिट्टी परीक्षण कराने और सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर ही नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग करने से उत्पादन बेहतर होगा और मिट्टी की गुणवत्ता भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने की अपील की है। किसानों को जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत जैसी जैविक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इन तकनीकों के इस्तेमाल से मिट्टी में मौजूद लाभदायक सूक्ष्म जीव सुरक्षित रहते हैं और भूमि की जलधारण क्षमता के साथ जैविक कार्बन में भी वृद्धि होती है। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने खेतों के कम से कम एक हिस्से में प्रायोगिक तौर पर प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में खेती की लागत कम होगी और मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी। किसानों को तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र एवं क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. हर साल खाद की कालाबाजारी रोकने के दावे किए जाते हैं, लेकिन आखिर अब तक कितने डीलर्स के लाइसेंस रद्द हुए और कितनों पर एफआईआर दर्ज हुई?

2. यदि प्रशासन पहले से सतर्क था तो हर सीजन में किसानों को खाद के लिए लाइन और संकट की स्थिति क्यों झेलनी पड़ती है?

3. प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात हो रही है, लेकिन जिले में कितने किसानों को वास्तव में जैविक खेती के लिए आर्थिक या तकनीकी सहायता मिली?

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