निर्माणाधीन भवन और कॉलोनियों में ट्रीटेड वाटर के उपयोग अनिवार्य |
इंदौर - शहर में भू-जल संरक्षण तथा पेयजल की बचत को ध्यान में रखते हुए नगर निगम द्वारा निर्माणाधीन भवनों एवं कॉलोनियों में ट्रीटेड वाटर के उपयोग को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल द्वारा समस्त भवन अधिकारी और भवन निरीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि शहर के सभी निर्माणाधीन भवनों, व्यावसायिक परियोजनाओं एवं कॉलोनियों का नियमित निरीक्षण कर ट्रीटेड वाटर के उपयोग की जांच की जाए।
निर्देशानुसार आज निगम के भवन अधिकारियों द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 64 निर्माणाधीन भवनों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान संबंधित भवन संचालकों एवं निर्माण एजेंसियों को ट्रीटेड वाटर उपयोग संबंधी नियमों की जानकारी देते हुए नोटिस जारी किए गए। निरीक्षण में पाया गया कि 34 निर्माणाधीन भवनों द्वारा आवश्यक शुल्क जमा करवाकर तत्काल प्रभाव से ट्रीटेड वाटर का उपयोग प्रारंभ कर दिया गया है। वहीं 30 निर्माणाधीन भवनों में ट्रीटेड वाटर का उपयोग नहीं पाया जाने पर निगम द्वारा सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित स्थलों पर निर्माण कार्य बंद करवाया गया।
पीने के पानी का दूर होगा संकट
नगर निगम प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि निर्माण कार्यों में पेयजल के स्थान पर ट्रीटेड वाटर का उपयोग किया जाना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य शहर में पेयजल की अनावश्यक खपत को रोकना, भू-जल स्तर को संरक्षित करना तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। निगम द्वारा समय-समय पर निरीक्षण अभियान चलाकर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा तथा उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही जारी रहेगी। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने समस्त निर्माण एजेंसियों, बिल्डर्स एवं भवन संचालकों से अपील की है कि वे निर्माण कार्यों में अनिवार्य रूप से ट्रीटेड वाटर का उपयोग करें तथा नगर निगम के पर्यावरण संरक्षण अभियान में सहयोग प्रदान करें।