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| हरदा में बच्चों ने म्यूजिक की धुन पर फिटनेस का ऐसा जोश दिखाया कि अभिभावक भी रह गए हैरान |
हरदा - आज के दौर में जहां बच्चे मोबाइल स्क्रीन और टीवी तक सीमित होते जा रहे हैं, वहीं हरदा में खेल विभाग ने बच्चों को फिर से मैदान की ओर लौटाने की अनोखी पहल की है। जिला खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘आरोह 2026’ सामुदायिक फिटनेस अभियान के तहत नेहरू स्टेडियम में म्यूजिकल एरोबिक डांसिंग मूवमेंट का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों, अभिभावकों और खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान पूरा स्टेडियम संगीत की धुनों और फिटनेस गतिविधियों से गूंज उठा। बच्चों ने म्यूजिक पर एरोबिक एक्सरसाइज, डांसिंग मूवमेंट और मनोरंजक फिटनेस एक्टिविटी में हिस्सा लेकर न केवल आनंद लिया, बल्कि शारीरिक गतिविधियों के प्रति नई रुचि भी दिखाई।
खेल समन्वयक सलमा खान ने बताया कि आज की पीढ़ी लगातार मोबाइल और टीवी में व्यस्त रहती है, जिससे बच्चे मैदानी खेलों से दूर हो रहे हैं। इसी चुनौती को देखते हुए ‘आरोह 2026’ अभियान के तहत प्रतिदिन नई और मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, ताकि बच्चों को खेल और फिटनेस से जोड़ा जा सके। एरोबिक हेल्थ फिटनेस एक्सपर्ट गरिमा बांके ने खिलाड़ियों और अभिभावकों को म्यूजिक पर एरोबिक व्यायाम कराए। उन्होंने कहा कि नियमित एरोबिक गतिविधियां शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मानसिक तनाव को भी कम करती हैं और आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार होती हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे घरों में भी बच्चों के साथ म्यूजिक एक्टिविटी करें, ताकि फिटनेस को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सके।
कार्यक्रम में आभा म्यूजिकल ग्रुप की गायिका आभा अग्रवाल ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर माहौल को और प्रेरणादायक बना दिया। वहीं महिला मोर्चा की जिला मंत्री प्रीति गहलोत ने बच्चों को खेलों के प्रति प्रेरित करते हुए कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता नहीं बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य का माध्यम हैं। मैदान में मौजूद अभिभावकों ने खेल विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों को नकारात्मक आदतों और डिजिटल लत से दूर कर स्वस्थ वातावरण प्रदान करती हैं। कार्यक्रम में जिला खेल प्रशिक्षक राजेश जलाबड़ा, अजय पुरवइया सहित बड़ी संख्या में खिलाड़ी और खेल प्रेमी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या ‘आरोह 2026’ केवल इवेंट आधारित अभियान बनकर रह जाएगा, या स्कूल स्तर पर स्थायी फिटनेस और खेल नीति भी लागू की जाएगी?
- जिले के ग्रामीण और गरीब बच्चों तक ऐसी गतिविधियों को पहुंचाने के लिए खेल विभाग की क्या ठोस योजना है?
- मोबाइल एडिक्शन को लेकर सरकार लगातार चिंता जताती है, लेकिन क्या स्कूलों में खेल पीरियड और मैदानों की वास्तविक स्थिति पर भी कोई सर्वे कराया गया है?
