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| शिवपुरी; सूनी पड़ी करैरा मंडी में फिर लौटी रौनक! प्रशासन की सख्ती से किसानों को मिलने लगा सही दाम Aajtak24 News |
शिवपुरी - जिले की करैरा कृषि उपज मंडी, जो लंबे समय से अव्यवस्थाओं और सुस्त व्यापार के कारण चर्चा में थी, अब एक बार फिर किसानों और व्यापारियों की चहल-पहल से गुलजार होती नजर आ रही है। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देशन और करैरा एसडीएम अनुराग निगवाल के लगातार प्रयासों से मंडी में व्यापारिक गतिविधियां तेज हुई हैं। शुक्रवार को मंडी परिसर में किसानों की भारी भीड़ और फसलों की पारदर्शी डाक बोली ने माहौल बदल दिया। एसडीएम अनुराग निगवाल, तहसीलदार ललित शर्मा और मंडी सचिव मनोहर घोष खुद मंडी पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रहकर किसानों की उपज की डाक बोली करवाई, जिससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके। प्रशासन की सक्रियता का असर यह रहा कि लंबे समय बाद मंडी में किसानों और व्यापारियों दोनों में उत्साह दिखाई दिया।
मंडी परिसर में किसान प्रतिनिधियों ने एसडीएम अनुराग निगवाल का माल्यार्पण कर स्वागत किया और प्रशासनिक प्रयासों की सराहना की। वहीं गर्मी को देखते हुए मंडी परिसर में किसानों और आम लोगों के लिए प्याऊ की शुरुआत भी की गई, जिससे लोगों को राहत मिल सके। व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने भी मंडी कार्यालय में एसडीएम से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। इस दौरान हम्माल और तुलावटी प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के प्रति आभार जताया। किसानों का कहना है कि प्रशासन की सख्ती और निगरानी के कारण अब मंडी में पारदर्शी तरीके से व्यापार हो रहा है और उन्हें फसल का बेहतर दाम मिल रहा है।
स्थानीय किसानों का मानना है कि यदि प्रशासन इसी तरह सक्रिय रहा तो करैरा मंडी फिर से क्षेत्र की प्रमुख कृषि मंडियों में शामिल हो सकती है। लंबे समय बाद मंडी में लौटती रौनक ने किसानों के चेहरे पर राहत और उम्मीद दोनों दिखाई हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल
- यदि प्रशासन की सक्रियता से अब किसानों को सही दाम मिलने लगे हैं, तो क्या यह माना जाए कि पहले मंडी में व्यापार व्यवस्था और डाक बोली प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हो रही थीं?
- करैरा मंडी लंबे समय तक सुस्त और अव्यवस्थित क्यों रही, और क्या इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों की जवाबदेही तय की गई है?
- प्रशासन पारदर्शी डाक बोली की बात कर रहा है, तो क्या किसानों की शिकायतों और मंडी में होने वाले लेन-देन की निगरानी के लिए कोई स्थायी ऑनलाइन या सार्वजनिक व्यवस्था लागू की जाएगी?
