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| टीकमगढ़ में मासूमों की मौत पर मंथन! प्रशासन बोला— गर्भ से लेकर पांच साल तक की देखभाल में लापरवाही नहीं चलेगी |
टीकमगढ़ - जिले में बढ़ती शिशु एवं बाल मृत्यु दर को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब सतर्क नजर आ रहा है। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय के आदेशानुसार एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ओ.पी. अनुरागी के मार्गदर्शन में जिला स्तरीय बाल मृत्यु समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की शिशु मृत्युदर कम करने के लिए स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच समन्वित प्रयासों पर जोर दिया गया। इसमें सभी खंड चिकित्सा अधिकारी, डीपीएम, डीसीएम, बीपीएम और बीसीएम मौजूद रहे।
बैठक में के.एम. वरुण ने कहा कि जन्म से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए गर्भावस्था से ही विशेष देखभाल आवश्यक है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं का प्रथम तिमाही में पंजीयन, समय पर जांच, आयरन-फोलिक एसिड और कैल्शियम की दवाओं का नियमित सेवन तथा संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराने और छह माह तक केवल मां का दूध देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने कहा कि छह माह तक बच्चों को पानी या बोतल का दूध नहीं दिया जाना चाहिए और दो वर्ष तक स्तनपान जारी रखना लाभकारी होता है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी शांतानु दीक्षित ने कहा कि बच्चों में संक्रमण या खतरे के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। उन्होंने पूर्ण टीकाकरण और समय पर उपचार को बाल मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण बताया। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि एसएनसीयू और एनआरसी से डिस्चार्ज बच्चों का आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार फॉलोअप किया जाए ताकि गंभीर स्थिति बनने से पहले बच्चों को उपचार मिल सके।
पूर्व में हुई बाल मृत्यु के मामलों की समीक्षा भी बैठक में की गई, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। साथ ही बीपीएम और बीसीएम अधिकारियों को पोर्टल एंट्री का ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि स्वास्थ्य विभाग लगातार समीक्षा बैठकें कर रहा है, तो जिले में अब भी बाल मृत्यु दर चिंताजनक क्यों बनी हुई है? क्या जमीनी स्तर पर योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो रहीं?
- ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और नवजातों की समय पर जांच और इलाज के लिए पर्याप्त डॉक्टर और स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं या केवल कागजों में व्यवस्थाएं दिखाई जाती हैं?
- बाल मृत्यु के मामलों की समीक्षा तो की जाती है, लेकिन क्या कभी जिम्मेदार अधिकारियों या स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई भी की गई है?
