
छतरपुर के किसान ने फूल उगाकर दो महीने में कर डाली तगड़ी कमाई Aajtak24 News
छतरपुर - जिले के ग्राम सरानी के एक किसान ने यह साबित कर दिया कि यदि खेती में नई तकनीक और सही योजना का उपयोग किया जाए तो कम जमीन और कम समय में भी बेहतर कमाई की जा सकती है। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में उद्यानिकी विभाग की अनुदान योजना का लाभ लेकर किसान मोहन लाल कुशवाहा ने अपने शेडनेट हाउस में फूलों की खेती कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। मोहन लाल ने पहले शेडनेट हाउस में खीरा, टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी सब्जियों की खेती शुरू की थी, जिससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हुई। लेकिन उन्होंने शेडनेट के खाली हिस्से का उपयोग करने का नया तरीका खोजा और फूलों की खेती शुरू करने का निर्णय लिया।
नवंबर महीने में उन्होंने लगभग 3 हजार गेलार्डिया फूलों के पौधे लगाए। इस पूरी खेती में करीब 15 हजार रुपये की लागत आई। किसान के अनुसार पौधे लगाने के दो महीने बाद ही फूल आना शुरू हो गए और उसी दौरान विवाह सीजन होने से बाजार में फूलों की मांग बढ़ गई। मोहन लाल ने बताया कि उन्हें फूलों का बाजार में 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक भाव मिला। दो महीने तक लगातार फूलों की तुड़ाई हुई, जिससे कुल लगभग 50 हजार रुपये की आय हुई। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें करीब 35 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
कम समय और कम लागत में हुए इस मुनाफे ने किसान का आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि अब वे भविष्य में फूलों की खेती का क्षेत्र और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं ताकि आय में और वृद्धि हो सके। प्रशासन और उद्यानिकी विभाग का मानना है कि मोहन लाल की यह सफलता अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगी। अधिकारियों के अनुसार यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी और फ्लोरीकल्चर जैसी गतिविधियों को अपनाएं तो उनकी आय में बड़ा बदलाव आ सकता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- सरकार आधुनिक खेती और शेडनेट योजनाओं की सफलता के उदाहरण पेश कर रही है, लेकिन जिले में कितने छोटे किसानों को वास्तव में इन योजनाओं का लाभ मिला है?
- फूलों की खेती में बाजार भाव अच्छा मिलने पर मुनाफा संभव है, लेकिन यदि मांग घट जाए तो किसानों को नुकसान से बचाने के लिए क्या कोई सुरक्षा व्यवस्था या खरीद नीति है?
- शेडनेट और उद्यानिकी योजनाओं में अनुदान वितरण को लेकर कई बार भ्रष्टाचार और चयन में पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। क्या प्रशासन लाभार्थियों की सूची और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक करेगा?