भिण्ड; कोर्ट के चक्कर से राहत का दावा… अब गांव-गांव घूमकर बुलाए जा रहे लोग लोक अदालत में Aajtak24 News

भिण्ड; कोर्ट के चक्कर से राहत का दावा… अब गांव-गांव घूमकर बुलाए जा रहे लोग लोक अदालत में Aajtak24 News

भिण्ड - जिले में 09 मई को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने व्यापक जनजागरण अभियान शुरू कर दिया है। लोगों को अदालतों के लंबे चक्कर और खर्चीली कानूनी प्रक्रिया से राहत दिलाने के उद्देश्य से बुधवार को जिला न्यायालय परिसर से प्रचार-वाहन रवाना किए गए, जो शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोक अदालत के लाभों की जानकारी देंगे। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार जिला न्यायालय भिण्ड सहित तहसील न्यायालय लहार, गोहद और मेहगांव में 09 मई को नेशनल लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इसी क्रम में एडीआर सेंटर जिला न्यायालय परिसर भिण्ड से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री के.एस. बारिया ने प्रचार-वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर लोगों को बताया गया कि नेशनल लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न प्रकार के प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित और सरल निराकरण किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि लोक अदालत में मामलों का निपटारा होने से समय और धन दोनों की बचत होती है तथा पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है।प्रचार अभियान के तहत वाहन पूरे भिण्ड शहर और आसपास के गांवों में घूमकर लोगों को लोक अदालत के प्रति जागरूक कर रहे हैं। प्रचार-वाहनों के साथ पैरालीगल वॉलेंटियर्स श्री धीरेन्द्र श्रीवास्तव और श्री रामाधार पुरोहित द्वारा आमजन को पेम्फलेट वितरित किए जा रहे हैं और लोक अदालत से मिलने वाले लाभों की जानकारी दी जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान न्यायाधीशगण, जिला विधिक सहायता अधिकारी, एलएडीसीएस अधिवक्ता तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी भी उपस्थित रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग लोक अदालत का लाभ उठाकर अपने प्रकरणों का आपसी सहमति से निराकरण करा सकें।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. हर साल लोक अदालतों के प्रचार पर खर्च किया जाता है, लेकिन कितने मामलों में वास्तव में स्थायी और संतोषजनक समाधान हुआ, इसका सार्वजनिक ऑडिट क्यों नहीं किया जाता?
  2. क्या प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि लोक अदालत में होने वाले समझौते पूरी तरह स्वैच्छिक हों, या कई मामलों में पक्षकारों पर जल्दी निपटारे का दबाव बनाया जाता है?
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता अब भी बेहद सीमित है, तो क्या सिर्फ प्रचार वाहन चलाने से न्याय तक पहुंच बढ़ जाएगी या स्थायी कानूनी सहायता तंत्र की भी जरूरत है?

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