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| शहडोल; उपार्जन केंद्रों पर कलेक्टर की नजर… कहीं तौल, कहीं इंतज़ार, किसानों की सुविधा पर प्रशासन अलर्ट |
शहडोल - जिले में समर्थन मूल्य पर चल रही गेहूं, चना और मसूर खरीदी व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिले में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए उप संचालक कृषि श्री के.एस. यादव ने बुधवार को विभिन्न उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जिले में शासन द्वारा गेहूं खरीदी के लिए 30 उपार्जन केंद्र तथा चना और मसूर खरीदी के लिए 2 केंद्र स्थापित किए गए हैं। निरीक्षण के दौरान उप संचालक कृषि ने गेहूं उपार्जन केंद्र पेपरेडी एवं भन्नी तथा चना-मसूर उपार्जन केंद्र ब्यौहारी मंडी पहुंचकर व्यवस्थाओं की स्थिति देखी।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों के लिए पेयजल, बैठने की व्यवस्था, छाया और समय पर तौल जैसी सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध रहें। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि केंद्रों पर पर्याप्त तौल कांटे मौजूद रहें ताकि किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े। बताया गया कि उपार्जन केंद्रों पर कुल छह तौल कांटे उपलब्ध हैं। पेपरेडी उपार्जन केंद्र में अब तक 6271.50 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इस केंद्र पर 672 किसानों ने स्लॉट बुक किए हैं, जिनमें से 274 किसानों का विक्रय कार्य अभी बाकी है। इससे स्पष्ट है कि खरीदी प्रक्रिया अभी भी जारी है और बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने की प्रतीक्षा में हैं।
वहीं ब्यौहारी मंडी में सेवा सहकारी समिति द्वारा अब तक 12.50 क्विंटल चना और 74 क्विंटल मसूर की खरीदी की गई है। निरीक्षण के दौरान उप संचालक कृषि ने केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिए कि खरीदी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और व्यवस्थित तरीके से संचालित हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्तर से भी उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही या अव्यवस्था सामने नहीं आनी चाहिए। प्रशासन चाहता है कि किसानों को समर्थन मूल्य पर उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो और खरीदी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब सैकड़ों किसानों के स्लॉट अब भी लंबित हैं, तो क्या खरीदी केंद्रों की क्षमता और संसाधन वास्तव में पर्याप्त हैं या सिर्फ कागजों में व्यवस्था दिखाई जा रही है?
- हर साल उपार्जन केंद्रों पर पेयजल, छाया और तौल व्यवस्था को लेकर शिकायतें आती हैं, फिर भी स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है?
- यदि मुख्यमंत्री स्तर तक निरीक्षण हो रहे हैं, तो क्या प्रशासन खरीदी केंद्रों पर दलालों, अवैध कटौती और किसानों की अनौपचारिक शिकायतों की भी स्वतंत्र जांच कराएगा?
