ग्वालियर; खाली हाथ पहुंची थी प्रीति… जनसुनवाई से लौटी तो हाथों में था उम्मीद का सहारा Aajtak24 News

ग्वालियर; खाली हाथ पहुंची थी प्रीति… जनसुनवाई से लौटी तो हाथों में था उम्मीद का सहारा Aajtak24 News

ग्वालियर - कलेक्ट्रेट की मंगलवार की जनसुनवाई उस समय भावुक हो गई, जब 75 प्रतिशत दिव्यांग महिला प्रीति शिवहरे अपनी जिंदगी की मुश्किलें लेकर प्रशासन के सामने पहुंचीं। आर्थिक तंगी, बेटी की जिम्मेदारी और आजीविका के साधन के अभाव से जूझ रही प्रीति को जनसुनवाई में वह सहारा मिला, जिसने उनकी जिंदगी में उम्मीद की नई किरण जगा दी। गदाईपुरा क्षेत्र की विजयनगर बस्ती निवासी श्रीमती प्रीति शिवहरे ने कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए बताया कि वह शारीरिक रूप से 75 प्रतिशत दिव्यांग हैं और उनकी 12 वर्षीय बेटी है। परिवार चलाने के लिए कोई स्थायी रोजगार नहीं होने से उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने प्रीति की बात गंभीरता से सुनी और तुरंत रेडक्रॉस सोसायटी से सिलाई मशीन उपलब्ध कराने के लिए धनराशि मंजूर कर दी। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जल्द से जल्द प्रीति को सिलाई मशीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। इस फैसले के बाद जनसुनवाई कक्ष में भावुक माहौल बन गया। प्रीति की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार ये बेबसी के नहीं बल्कि राहत और उम्मीद के थे। वह कुछ बोल नहीं पाईं, लेकिन उनके चेहरे की मुस्कान यह बता रही थी कि अब जिंदगी बदलने की उम्मीद जाग चुकी है।

यह सिर्फ एक सिलाई मशीन नहीं, बल्कि एक मां के आत्मसम्मान और उसकी बेटी के भविष्य को संभालने की कोशिश मानी जा रही है। जनसुनवाई से लौटते समय प्रीति के चेहरे पर आई चमक प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल बन गई। इसी तरह मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में कुल 119 लोगों की समस्याएं सुनी गईं। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, अपर कलेक्टर श्री कुमार सत्यम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत और एडीएम श्री सीबी प्रसाद सहित अन्य अधिकारियों ने लोगों की शिकायतों पर सुनवाई की।

जनसुनवाई में राजस्व, नगर निगम, बिजली, पुलिस और जमीन संबंधी विवादों के मामले सामने आए। अधिकारियों को इन मामलों का समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जरूरतमंद लोगों के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा कराई गई। कलेक्ट्रेट में प्राप्त 119 आवेदनों में से 55 आवेदन दर्ज किए गए, जबकि शेष 64 आवेदन संबंधित विभागों को निराकरण के लिए भेजे गए। ग्वालियर की यह जनसुनवाई अब केवल शिकायतों का मंच नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों के लिए उम्मीद और सहारे का जरिया बनती दिखाई दे रही है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि एक दिव्यांग महिला को आजीविका के लिए जनसुनवाई तक आना पड़ा, तो सवाल यह है कि सामाजिक न्याय और दिव्यांग कल्याण योजनाएं जमीनी स्तर पर आखिर कितनी प्रभावी हैं?
  2. जनसुनवाई में हर सप्ताह बड़ी संख्या में आर्थिक सहायता और बुनियादी जरूरतों से जुड़े मामले सामने आते हैं। क्या यह संकेत नहीं है कि विभागीय योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा?
  3. 119 आवेदनों में केवल 55 आवेदन दर्ज हुए, जबकि बाकी विभागों को भेज दिए गए। ऐसे मामलों की मॉनिटरिंग कैसे होगी ताकि शिकायतें फाइलों में दबकर न रह जाएं?

Post a Comment

Previous Post Next Post