सीहोर; 57 फरियादी, एक जनसुनवाई… सीहोर कलेक्ट्रेट में समस्याओं का अंबार, समाधान का इंतजार! Aajtak24 News

सीहोर; 57 फरियादी, एक जनसुनवाई… सीहोर कलेक्ट्रेट में समस्याओं का अंबार, समाधान का इंतजार! Aajtak24 News

सीहोर - कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में जिलेभर से पहुंचे नागरिकों ने अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। जनसुनवाई में कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने स्वयं आमजन की शिकायतें सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में कुल 57 आवेदकों ने अलग-अलग समस्याओं से जुड़े आवेदन प्रस्तुत किए। इनमें भूमि विवाद, नामांतरण, बंटवारा, मेढ़ और रास्ता विवाद, बीपीएल कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन, आर्थिक सहायता, मुआवजा और गन लाइसेंस जैसे मामलों की शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आईं।

कलेक्ट्रेट में सुबह से ही फरियादियों की भीड़ लगी रही। कई लोग ऐसे भी पहुंचे, जो लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का निराकरण तय समय सीमा में किया जाए और आवेदकों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। जिला मुख्यालय के साथ-साथ जनपद कार्यालयों में भी जनसुनवाई आयोजित की गई, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को राहत मिल सके। प्रशासन का दावा है कि इस व्यवस्था से आम नागरिकों को अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।

हालांकि जनसुनवाई में हर सप्ताह बड़ी संख्या में पहुंच रही शिकायतें यह भी संकेत दे रही हैं कि कई विभागों में नियमित स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि लोगों को आखिरकार जनसुनवाई का सहारा लेना पड़ रहा है। जनसुनवाई में संयुक्त कलेक्टर सुश्री वंदना राजपूत, एसडीएम श्री तन्मय वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि हर सप्ताह बड़ी संख्या में लोग जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं, तो क्या यह माना जाए कि विभागीय स्तर पर आम नागरिकों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा?
  2. भूमि विवाद, नामांतरण और बंटवारे जैसे मामले लगातार जनसुनवाई में आ रहे हैं। आखिर राजस्व विभाग की नियमित कार्यप्रणाली में ऐसी क्या कमी है कि लोगों को सीधे कलेक्टर तक पहुंचना पड़ रहा है?
  3. जनसुनवाई में अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के निर्देश तो दिए जाते हैं, लेकिन कितने मामलों का वास्तविक समाधान तय समय में होता है? क्या प्रशासन इसकी सार्वजनिक मॉनिटरिंग भी करेगा?

Post a Comment

Previous Post Next Post