“मालवाहक में ठूंस रहे थे इंसानी जानें! परिवहन विभाग की कार्रवाई में दो पिकअप वाहन धराए” Aajtak24 News

“मालवाहक में ठूंस रहे थे इंसानी जानें! परिवहन विभाग की कार्रवाई में दो पिकअप वाहन धराए” Aajtak24 News

खंडवा - जिले में मालवाहक वाहनों में अवैध रूप से सवारियां ढोने का खेल एक बार फिर सामने आया है। ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से चल रही इस खतरनाक व्यवस्था पर रविवार को परिवहन विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो पिकअप लोडिंग वाहनों को पकड़ा और उन पर जुर्माना लगाया। विभाग ने कार्रवाई के दौरान 15 हजार रुपए का राजस्व वसूला। जानकारी के मुताबिक परिवहन विभाग की टीम ने ग्राम खालवा क्षेत्र में विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान ऐसे पिकअप वाहन पकड़े गए जिनका पंजीयन माल ढुलाई के लिए था, लेकिन उनमें यात्रियों को बैठाकर परिवहन किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के वाहन न केवल नियमों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि यात्रियों की जान को भी खतरे में डालते हैं।

अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दीपक मांझी ने बताया कि जांच के दौरान दो पिकअप लोडिंग वाहनों पर चालानी कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि मालवाहक वाहनों में सवारी बैठाना मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर देखा जाता है कि यात्री बसों और सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण लोग मजबूरी में पिकअप और मालवाहक वाहनों में सफर करते हैं। कई बार इन वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके बावजूद ऐसे वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ते रहते हैं।

परिवहन विभाग का दावा है कि जिले में अवैध यात्री परिवहन के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं, तो नियमित निगरानी के बावजूद ऐसे वाहन प्रशासन की नजर से कैसे बच जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चालान काटने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित और नियमित सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था मजबूत किए बिना लोग मजबूरी में ऐसे खतरनाक विकल्पों का इस्तेमाल करते रहेंगे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से मालवाहक वाहनों में खुलेआम सवारियां ढोई जा रही हैं, तो परिवहन विभाग अब तक नियमित और प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया?
  2. क्या केवल 15 हजार रुपए का जुर्माना ऐसे वाहन संचालकों को रोकने के लिए पर्याप्त है, जबकि इससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ती है?
  3. यदि प्रशासन अवैध यात्री परिवहन रोकना चाहता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बढ़ाने के लिए क्या ठोस योजना है?

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