| नीमच; रात्रि चौपाल में खुलीं ग्रामीणों की परेशानियां… कलेक्टर ने अफसरों को लगाई फटकार Aajtak24 News |
नीमच - जिले में ग्रामीणों की शिकायतों और लंबित समस्याओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने रात्रि चौपालों में प्राप्त आवेदनों और शिकायतों की विभागवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को त्वरित एवं सकारात्मक निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री अमन वैष्णव, एडीएम बी.एस. कलेश, एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर और विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की समस्याओं को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि मौके पर जाकर समाधान सुनिश्चित किया जाए।
रात्रि चौपाल के दौरान टामोटी क्षेत्र के ग्रामीणों ने जल निगम की पाइपलाइन व्यवस्था को लेकर शिकायत की थी। ग्रामीणों का कहना था कि कुछ घरों तक पाइपलाइन कनेक्शन नहीं पहुंचा और वे योजना से वंचित रह गए। इस पर कलेक्टर ने जल निगम के महाप्रबंधक को संबंधित सहायक यंत्री और उपयंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामीणों की समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में गांधीसागर से रामपुरा-मनासा सूक्ष्म प्रेशरयुक्त सिंचाई योजना से कुछ गांवों के छूट जाने का मुद्दा भी उठा। इस पर कलेक्टर ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री के प्रति नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि छूटे हुए गांवों को योजना में शामिल करने का प्रस्ताव तुरंत शासन को भेजा जाए। इसके अलावा सिंगोली क्षेत्र के एक क्षतिग्रस्त जलाशय की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य जनभागीदारी से तत्काल शुरू कराने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने सभी सीएमओ और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को फल, सब्जी और खाद्य पदार्थ बेचने वाली दुकानों की सघन जांच करने तथा नमूने लेकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने एसडीएम को इस अभियान की नियमित मॉनिटरिंग करने को भी कहा। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने दो टूक कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं के निराकरण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभाग जनता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता से हल करें।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि जल निगम की योजनाओं में कई घर अब भी कनेक्शन से वंचित हैं, तो क्या इन परियोजनाओं की जमीनी मॉनिटरिंग और गुणवत्ता जांच वास्तव में प्रभावी है?
- सिंचाई योजनाओं से गांवों के छूट जाने जैसी गंभीर चूक पर क्या केवल प्रस्ताव भेजना पर्याप्त है, या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी?
- खाद्य पदार्थों की जांच और कार्रवाई के निर्देश बार-बार दिए जाते हैं, लेकिन मिलावट और खराब गुणवत्ता की शिकायतें लगातार क्यों बनी रहती हैं?