मंदसौर; कोर्ट की लंबी तारीखों से छुटकारे का दावा… गांव-गांव भेजा गया ‘न्याय रथ Aajtak24 News

मंदसौर; कोर्ट की लंबी तारीखों से छुटकारे का दावा… गांव-गांव भेजा गया ‘न्याय रथ  Aajtak24 News

मंदसौर - जिले में 9 मई को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत के प्रचार-प्रसार के लिए जिला न्यायालय प्रशासन ने जनजागरण अभियान शुरू कर दिया है। बुधवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अनीष कुमार मिश्रा ने प्रचार-रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जाकर लोगों को लोक अदालत की उपयोगिता और लाभों के बारे में जागरूक करेगा। मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाली इस नेशनल लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित और सरल निराकरण किया जाएगा।

प्रचार अभियान के दौरान लोगों को बताया जा रहा है कि लोक अदालत के माध्यम से बैंक ऋण विवाद, बिजली बिल संबंधी मामले, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, पारिवारिक और वैवाहिक विवाद, राजीनामा योग्य आपराधिक मामले तथा अन्य सिविल प्रकरणों का समाधान कम समय और कम खर्च में किया जा सकता है।

न्यायिक अधिकारियों का कहना है कि लोक अदालत न केवल मामलों के शीघ्र निपटारे का माध्यम है, बल्कि इससे पक्षकारों के बीच आपसी सौहार्द बनाए रखने में भी मदद मिलती है। यही कारण है कि अधिक से अधिक लोगों को इस व्यवस्था से जोड़ने के लिए प्रचार-रथ के जरिए गांव-गांव और शहर-शहर अभियान चलाया जा रहा है।

इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री सुधीर सिंह निगवाल, विद्युत विभाग के अधिकारी, अधिवक्ता एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे अपने लंबित मामलों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से कराकर इस अवसर का लाभ उठाएं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. लोक अदालतों में बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे का दावा किया जाता है, लेकिन कितने मामलों में बाद में फिर विवाद या कानूनी चुनौती सामने आती है?
  2. क्या यह सुनिश्चित किया जाता है कि लोक अदालत में होने वाले समझौते पूरी तरह स्वैच्छिक हों और किसी पक्ष पर दबाव न बनाया जाए?
  3. ग्रामीण और गरीब वर्ग के लोग अक्सर कानूनी प्रक्रिया को समझ नहीं पाते, तो क्या लोक अदालतों में उन्हें स्वतंत्र कानूनी सलाह और पर्याप्त प्रतिनिधित्व वास्तव में मिल पाता है?

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