बालाघाट; स्कूलों में नामांकन धीमा पड़ा तो होगी कार्रवाई… कलेक्टर ने शिक्षा अफसरों को दिया एक हफ्ते का अल्टीमेटम Aajtak24 News

बालाघाट; स्कूलों में नामांकन धीमा पड़ा तो होगी कार्रवाई… कलेक्टर ने शिक्षा अफसरों को दिया एक हफ्ते का अल्टीमेटम Aajtak24 News

बालाघाट - जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने जिले के सभी विकासखंडों के बीआरसी और खंड शिक्षा अधिकारियों की बैठक लेकर शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की और कई मामलों में नाराजगी जताते हुए सख्त निर्देश जारी किए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ, जिला शिक्षा अधिकारी अश्विनी उपाध्याय और सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक जीपी बर्मन भी मौजूद रहे।

बैठक में सबसे पहले उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में 30 हजार 500 असाक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लक्ष्य के तहत 14 अप्रैल 2026 को मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें 26 हजार 696 लोग शामिल हुए। इनमें से 25 हजार 880 लोगों की ऑनलाइन एंट्री की जा चुकी है। जिले में करीब चार हजार वालंटियर इस अभियान में सेवाएं दे रहे हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि वालंटियर्स के कार्य की नियमित निगरानी हो और उन्हें शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई पुस्तकें समय पर वितरित की जाएं।

नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने पाया कि बिरसा, कटंगी, लालबर्रा, परसवाड़ा और वारासिवनी विकासखंडों में प्रगति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी बच्चों को पुस्तकें देने के साथ उनकी ऑनलाइन एंट्री भी अनिवार्य रूप से की जाए। बैठक में एफएलएन सर्वे यानी बुनियादी भाषा और गणितीय दक्षता की स्थिति पर भी चिंता जताई गई। कलेक्टर ने कहा कि जिले की कई स्कूलों में बच्चों की गिनती और हिंदी भाषा की समझ बेहद कमजोर पाई गई है। उन्होंने निर्देश दिए कि कमजोर शैक्षणिक स्तर वाली शालाओं के शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव जिला कार्यालय को भेजा जाए।

नामांकन की समीक्षा के दौरान खैरलांजी, बैहर, वारासिवनी और बिरसा विकासखंडों की प्रगति धीमी पाई गई। इस पर कलेक्टर मृणाल मीना ने सभी बीआरसी और बीईओ को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि एक सप्ताह के भीतर सभी स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि लक्ष्य पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बैठक में छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल वितरण और उसकी पोर्टल एंट्री में लापरवाही का मामला भी सामने आया। परसवाड़ा विकासखंड में 362 साइकिलों के वितरण के बावजूद पोर्टल पर एंट्री नहीं की गई थी, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्षा शुरू होने से पहले सभी जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और सुधार कार्य पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि बारिश के दौरान किसी भी स्कूल भवन से पानी टपकने या भवन की खराब स्थिति की शिकायत मिलने पर संबंधित बीआरसी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके अलावा छात्रवृत्ति, पेंशन प्रकरणों और स्कूलों में शौचालयों की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि स्कूलों में साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि कई स्कूलों में बच्चों की भाषा और गणितीय समझ बेहद कमजोर है, तो क्या केवल शिक्षकों पर कार्रवाई पर्याप्त है या पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तय होगी?
  2. साइकिल वितरण और पाठ्यपुस्तकों की ऑनलाइन एंट्री तक समय पर नहीं हो पा रही, तो क्या विभाग की डिजिटल मॉनिटरिंग प्रणाली वास्तव में प्रभावी है?
  3. हर साल बारिश से पहले स्कूल भवनों की मरम्मत के निर्देश दिए जाते हैं, फिर भी जर्जर स्कूलों और टपकती छतों की शिकायतें लगातार क्यों सामने आती हैं?

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