महासमुंद; नीलगाय के शिकार के बाद मचा दबाव: तीन आरोपियों ने वन विभाग के सामने किया सरेंडर Aajtak24 News

महासमुंद; नीलगाय के शिकार के बाद मचा दबाव: तीन आरोपियों ने वन विभाग के सामने किया सरेंडर Aajtak24 News

महासमुंद - जिले के पिथौरा वन परिक्षेत्र में मादा नीलगाय के अवैध शिकार मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 4 मई को ग्राम सुखीपाली के शांतिनगर क्षेत्र में हुए वन्यजीव शिकार प्रकरण में तीन आरोपियों ने वन विभाग के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। वन विभाग ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि एक अन्य आरोपी अब भी फरार बताया जा रहा है। वन विभाग के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में ईश्वर राणा, टंकधर और विद्याधर प्रधान शामिल हैं। तीनों ने वन परिक्षेत्र कार्यालय पिथौरा पहुंचकर आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वन विभाग का दबाव या बढ़ती सख्ती?

वन विभाग का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार वन्यजीव शिकार के मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई की जा रही है। लगातार दबिश और तलाश अभियान के चलते आरोपियों ने सरेंडर किया। अधिकारियों के मुताबिक मामले में गहन पूछताछ जारी है और शिकार में इस्तेमाल हथियारों तथा अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि फरार आरोपी की तलाश लगातार जारी है और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया गया है।

जंगलों में बढ़ते शिकार पर फिर उठे सवाल

मादा नीलगाय के शिकार की घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों से लगे गांवों में कई बार अवैध शिकार की घटनाएं होती हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में कार्रवाई देर से होती है। वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि नीलगाय जैसे संरक्षित वन्यजीव का खुलेआम शिकार होना वन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी मजबूत नहीं की गई तो क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या प्रभावित हो सकती है।

अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई मयंक पाण्डेय के आदेश और डिम्पी बैस के मार्गदर्शन में की गई। वहीं सुखराम निराला के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई में वनपाल, वनरक्षकों और सुरक्षा श्रमिकों की विशेष भूमिका रही।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि वन विभाग की निगरानी व्यवस्था मजबूत है, तो संरक्षित वन्यजीव मादा नीलगाय का शिकार आखिर कैसे हो गया? क्या क्षेत्र में नियमित गश्त नहीं हो रही थी?
  2. क्या आरोपियों ने दबाव बढ़ने के कारण आत्मसमर्पण किया, और क्या इस मामले में किसी बड़े शिकार गिरोह या स्थानीय नेटवर्क की भूमिका की भी जांच हो रही है?
  3. वन विभाग हर बार “कड़ी कार्रवाई” की बात करता है, लेकिन लगातार सामने आ रहे शिकार मामलों को रोकने के लिए जमीन पर कौन-सी नई रणनीति लागू की गई है?

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