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| राजनांदगांव; सुंदरा में लगा जनसमस्या निवारण शिविर, 1345 आवेदन पहुंचे प्रशासन के पास Aajtak24 News |
राजनांदगांव - जिले के ग्राम पंचायत सुंदरा में “सुशासन तिहार 2026” के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी। शिविर में 20 से अधिक गांवों के लोग पहुंचे और अपनी समस्याओं, मांगों तथा योजनाओं से जुड़े आवेदन प्रशासन को सौंपे। प्रशासन के मुताबिक शिविर में कुल 1345 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 1329 मांग संबंधी और 16 शिकायत संबंधी आवेदन शामिल हैं। शिविर में 40 विभागों ने स्टॉल लगाकर ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया।
एक ही जगह मिली कई सरकारी सुविधाएं
शिविर में परिवहन विभाग ने लर्निंग लाइसेंस बनाए, श्रम विभाग ने श्रमिक पंजीयन किया, स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाइयों का वितरण किया, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग ने महतारी वंदन योजना के तहत ई-केवाईसी सत्यापन किया। ग्रामीणों को राशन, स्वास्थ्य, रोजगार, श्रम पंजीयन, सामाजिक योजनाओं और दस्तावेज संबंधी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने का दावा किया गया। प्रशासन ने इसे “गांव तक शासन पहुंचाने की पहल” बताया।
भीड़ ज्यादा, समाधान कितना?
हालांकि शिविर में बड़ी संख्या में आवेदन पहुंचना यह भी दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी मूलभूत समस्याएं बड़ी संख्या में मौजूद हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि हर शिविर में सैकड़ों-हजारों आवेदन तो जमा हो जाते हैं, लेकिन उनका वास्तविक निराकरण कितनी तेजी से होता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई समस्याएं वर्षों से लंबित हैं और हर बार आवेदन देने के बाद भी केवल आश्वासन मिलता है। ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इन 1345 आवेदनों में से कितनों का समयसीमा में समाधान कर पाता है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी
शिविर में जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिमा पप्पू चंद्राकर, जिला पंचायत सदस्य देव कुमारी साहू, शीला राकेश सिन्हा, एसडीएम गौतम पाटिल और जनपद पंचायत सीईओ मनीष साहू सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब एक ही शिविर में 1345 आवेदन आए हैं, तो क्या यह नहीं दिखाता कि गांवों में मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है?
- पिछले जनसमस्या निवारण शिविरों में मिले आवेदनों में से कितनों का वास्तविक निराकरण हुआ और कितने मामले अब भी लंबित हैं?
- क्या प्रशासन इन शिविरों को केवल “आवेदन संग्रह अभियान” बनने से रोकने के लिए कोई सार्वजनिक मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करेगा, जिससे ग्रामीण अपने आवेदन की स्थिति जान सकें?
