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| मुख्यमंत्री जोसेफ विजय का पहला प्रहार, स्कूलों और मंदिरों के पास शराब की दुकानें बंद करने का आदेश Aajtak24 News |
चेन्नई - तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। 'तमिलगा वेत्री कषगम' (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही अपने तेवर साफ कर दिए हैं। सत्ता संभालते ही सीएम विजय 'फुल एक्शन मोड' में नजर आ रहे हैं। उन्होंने राज्य में सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाते हुए मंदिरों, स्कूलों और बस अड्डों के आसपास स्थित शराब की दुकानों को बंद करने का फरमान जारी किया है।
500 मीटर का दायरा: नशे के खिलाफ 'सर्जिकल स्ट्राइक'
मुख्यमंत्री विजय ने आदेश दिया है कि राज्य की सभी सरकारी शराब दुकानें (TASMAC), जो पूजा स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों या बस टर्मिनलों के 500 मीटर के दायरे में आती हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। सरकार ने इस आदेश को लागू करने के लिए प्रशासन को मात्र दो हफ्ते का समय दिया है। इस फैसले का उद्देश्य युवाओं को नशे से बचाना और सार्वजनिक स्थानों की गरिमा बनाए रखना है।
शपथ लेते ही तीन फाइलों पर किए हस्ताक्षर
शपथ ग्रहण मंच पर ही मुख्यमंत्री विजय ने अपने चुनावी घोषणापत्र के प्रमुख वादों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया। उन्होंने सबसे पहले तीन महत्वपूर्ण फाइलों पर हस्ताक्षर किए:
मुफ्त बिजली: प्रदेश के गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देते हुए 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने के आदेश पर मुहर लगाई।
महिला सुरक्षा: महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स के गठन का निर्णय लिया।
नशा मुक्ति: हर जिले में नशे के कारोबार पर लगाम कसने के लिए एक विशेष एंटी-नारकोटिक्स फोर्स बनाने की मंजूरी दी।
विधानसभा में शपथ ग्रहण और 'प्रमाण-पत्र' का ड्रामा
सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री विजय ने सबसे पहले 'पूर्ण निष्ठा' के नाम पर विधायक पद की शपथ ली। उनके साथ कैबिनेट मंत्रियों और विपक्षी नेताओं ने भी शपथ ग्रहण की। हालांकि, इस दौरान सदन में कुछ दिलचस्प और अजीबोगरीब वाकये भी हुए।
नवनियुक्त महिला मंत्री कीर्तना जब शपथ लेने मंच पर पहुँचीं, तो वे अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र साथ लाना भूल गईं, जिसके कारण उन्हें वापस जाना पड़ा। बाद में प्रमाण-पत्र पेश करने पर ही उन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। वहीं, वेलाचेरी से टीवीके विधायक आर. कुमार को उस वक्त असहज स्थिति का सामना करना पड़ा जब सचिव ने टोका कि उनके द्वारा जमा किए गए प्रमाण-पत्र पर किसी और का नाम दर्ज है।
विपक्ष की मौजूदगी और राजनीतिक शिष्टाचार
सदन में द्रमुक (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम ने भी शपथ ली। जहाँ एक ओर पलानीस्वामी ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली, वहीं विजय और उदयनिधि ने संवैधानिक निष्ठा के नाम पर पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री विजय के इन शुरुआती फैसलों ने राज्य की जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजा है। शराब बंदी की दिशा में उठाया गया यह सीमित लेकिन प्रभावी कदम और मुफ्त बिजली का वादा, भविष्य की राजनीति के लिए एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।
