बैतूल; तवा किनारे ‘काला खेल’! लावारिस कोयला मिला, लेकिन खदान चलाने वाले कौन? Aajtak24 News

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बैतूल - जिले के घोड़ाडोंगरी तहसील अंतर्गत ग्राम डुल्हारा और सिवनपाट में अवैध कोयला उत्खनन और भंडारण को लेकर खनिज विभाग ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। तवा नदी क्षेत्र में अवैध खनन की सूचना मिलने के बाद खनिज अमले ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र से लगभग एक ट्रॉली अवैध रूप से भंडारित कोयला लावारिस हालत में बरामद किया गया, जिसे जब्त कर चोपना थाना पुलिस की अभिरक्षा में रखा गया है।

कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के निर्देश पर जिले में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत खनिज विभाग की टीम ने तवा नदी के आसपास के इलाकों में सघन जांच की। हालांकि निरीक्षण के दौरान कोई व्यक्ति मौके पर कोयला निकालते या परिवहन करते नहीं मिला।

खनिज विभाग के अनुसार जिस स्थान से कोयला बरामद हुआ, वहां आसपास ताजा खनन के निशान नहीं मिले। विभाग का दावा है कि क्षेत्र में पहले से बने गड्ढों को बंद कर दिया गया है और वहां कोयले के उत्खनन के अवशेष भी नहीं पाए गए। टीम ने ग्रामीणों से भी जानकारी जुटाने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मौके पर कोई खनन गतिविधि नहीं मिली और गड्ढे भी बंद बताए जा रहे हैं, तो फिर एक ट्रॉली कोयला आखिर वहां पहुंचा कैसे? क्या अवैध खनन करने वाले कार्रवाई से पहले ही सतर्क हो गए थे, या फिर क्षेत्र में लंबे समय से संगठित तरीके से यह खेल चल रहा है?

गौरतलब है कि खनिज विभाग इससे पहले भी इसी क्षेत्र में अवैध कोयला उत्खनन और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। इसके बावजूद तवा नदी क्षेत्र में बार-बार कोयला मिलने की घटनाएं प्रशासनिक निगरानी और स्थानीय नेटवर्क पर सवाल खड़े कर रही हैं। फिलहाल विभाग ने इलाके में सतत निगरानी और सघन अभियान जारी रखने की बात कही है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब मौके पर ताजा खनन के निशान नहीं मिले, तो फिर एक ट्रॉली कोयला वहां तक पहुंचा कैसे? क्या विभाग यह मान रहा है कि अवैध नेटवर्क पहले से सक्रिय है लेकिन जिम्मेदारों तक पहुंच नहीं हो पा रही?
  2. खनिज विभाग पहले भी इसी इलाके में कार्रवाई कर चुका है, फिर बार-बार डुल्हारा और सिवनपाट क्षेत्र से अवैध कोयले की शिकायतें क्यों सामने आती हैं? क्या स्थानीय स्तर पर किसी संरक्षण की आशंका से इंकार किया जा सकता है?
  3. ग्रामीणों ने जानकारी नहीं दी या जानकारी देने से बचते रहे—क्या प्रशासन को आशंका है कि अवैध कोयला कारोबार में स्थानीय दबाव या संगठित गिरोह की भूमिका हो सकती है?

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