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| इंदौर; लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई! इंदौर कलेक्टर ने स्वास्थ्य अफसरों को दी दो टूक चेतावनी Aajtak24 News |
इंदौर - इंदौर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन अब सख्त रुख में दिखाई दे रहा है। जिला स्वास्थ्य समिति एवं डीक्यूएसी की बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि योजनाओं में लापरवाही और अनियमितता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में गर्भवती महिलाओं के पंजीयन, मातृ स्वास्थ्य, बच्चों के टीकाकरण और स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं को लेकर विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले की सभी गर्भवती महिलाओं का पंजीयन शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं का नियमित बीपी और हिमोग्लोबिन परीक्षण किया जाए तथा एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को आयरन टैबलेट और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं।
बैठक में मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और सभी जानकारी अनमोल पोर्टल पर समय पर दर्ज हो। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बच्चों के टीकाकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को बच्चों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और संक्रमण से बचाव पर विशेष ध्यान देने को कहा। साथ ही सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पीने के पानी और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में मलेरिया उन्मूलन और अंधत्व निवारण कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने जिला अस्पताल सहित चोरल, पिवड़ाय, दुधिया और हरसोला स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति जानी। मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक परियोजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा “सुगम्य इंदौर अभियान” के तहत सार्वजनिक भवनों के एक्सेस ऑडिट और डिजिटली सर्वेक्षण की जानकारी भी बैठक में दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि “डिस्ट्रिक जीआईएस परख” ऐप के माध्यम से भवनों के सर्वे की निगरानी की जाएगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल
- यदि सभी गर्भवती महिलाओं का पंजीयन और नियमित जांच सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है, तो जिले में अब भी एनीमिया और मातृ मृत्यु के मामले लगातार क्यों सामने आ रहे हैं?
- क्या स्वास्थ्य विभाग यह स्वीकार करेगा कि कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर, दवाइयां और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीण महिलाएं निजी अस्पतालों पर निर्भर होने को मजबूर हैं?
- बच्चों के 100 प्रतिशत टीकाकरण का दावा किया जा रहा है, तो क्या प्रशासन के पास ऐसे क्षेत्रों की सूची है जहां अब भी टीकाकरण से वंचित बच्चे मौजूद हैं, या आंकड़ों को सिर्फ कागजों में पूरा दिखाया जा रहा है?
