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| छिंदवाड़ा; शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में फूटा अफसरों का सख्त रुख… लंबित मामलों पर कार्रवाई की चेतावनी Aajtak24 News |
छिंदवाड़ा - जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में गुरुवार को संभागीय स्तर की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें पी.पी. सिंह और डी.के. खरे ने विभागीय योजनाओं और शैक्षणिक प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले के विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्रोत समन्वयक शामिल हुए। बैठक में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पी.एल. मेश्राम, सहायक संचालक डी.पी. डेहरिया, एडीपीसी अविनाश दीक्षित और जिला परियोजना समन्वयक जे.के. इडपाचे भी मौजूद रहे।
संभागीय अधिकारियों ने वन-टू-वन चर्चा के जरिए प्रत्येक विकासखंड की स्थिति का आकलन किया। समीक्षा में कक्षा 1 से 12 तक विद्यार्थियों के नामांकन, साइकिल वितरण, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण, सीएम हेल्पलाइन, अनुकंपा नियुक्ति और पेंशन प्रकरण जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने लंबित मामलों के निराकरण में तेजी लाने के निर्देश देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।
हालांकि विभागीय बैठकों में हर बार समीक्षा और निर्देशों का दौर चलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्कूलों में शिक्षकों की कमी, समय पर पाठ्यपुस्तक वितरण, छात्रवृत्ति और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं अब भी कई क्षेत्रों में बनी हुई हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या समीक्षा बैठकों के निर्देश वास्तव में स्कूलों तक असर छोड़ पाएंगे या फिर यह प्रक्रिया केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर हर समीक्षा बैठक में लंबित प्रकरणों पर नाराजगी जताई जाती है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कितनी वास्तविक कार्रवाई हुई है?
- सरकारी स्कूलों में शिक्षक कमी, कमजोर रिजल्ट और मूलभूत सुविधाओं की समस्याएं लगातार बनी हुई हैं, तो विभागीय मॉनिटरिंग कितनी प्रभावी मानी जाए?
- साइकिल और पाठ्यपुस्तक वितरण जैसी योजनाओं में हर साल देरी की शिकायतें आती हैं, तो क्या इसके लिए जवाबदेही तय करने का कोई स्थायी सिस्टम है?
