सिरमौर तहसील में 'अंधेरगर्दी': भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे जिम्मेदार, कलेक्टर के आदेशों की सरेआम उड़ रही धज्जियां Aajtak24 News

सिरमौर तहसील में 'अंधेरगर्दी': भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे जिम्मेदार, कलेक्टर के आदेशों की सरेआम उड़ रही धज्जियां Aajtak24 News

रीवा/सिरमौर/लालगांव - रीवा जिले की सिरमौर तहसील इन दिनों जनसेवा के बजाय भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी का अखाड़ा बन चुकी है। विशेष रूप से लालगांव वृत्त में पदस्थ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि यहाँ न केवल जनता का शोषण किया जा रहा है, बल्कि जिला कलेक्टर के सख्त निर्देशों को भी ठेंगे पर रखा जा रहा है।

कलेक्टर का बैन बेअसर: बोरिंग मशीन छोड़ने पर मचा बवाल

जिले में भीषण जल संकट को देखते हुए कलेक्टर रीवा ने नलकूप खनन (बोरिंग) पर कड़ा प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद, लालगांव क्षेत्र में पकड़ी गई एक बोरिंग मशीन को बिना किसी ठोस कानूनी कार्रवाई के रातों-रात छोड़ दिया गया। क्षेत्र में चर्चा है कि तहसीलदार और संबंधित अमले ने भारी 'लेन-देन' के बाद मशीन को मुक्त किया है। यह मामला सीधे तौर पर जिला कलेक्टर के आदेशों की अवहेलना और प्रशासनिक मिलीभगत को दर्शाता है।

अधिवक्ताओं का फूटा गुस्सा: "दलालों का अड्डा बनी तहसील"

वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश मिश्रा ने तहसील की व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे भ्रष्टाचार का केंद्र बताया है। उनके प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:

  • रिश्वत का खुला खेल: तहसील कार्यालय में बिना रिश्वत के एक भी फाइल आगे नहीं बढ़ रही है। छोटे से छोटे काम के लिए आम जनता को दर-दर भटकना पड़ रहा है।

  • बिचौलियों का कब्जा: तहसील परिसर अब आम नागरिकों के बजाय दलालों और 'सेटिंग' करने वालों का ठिकाना बन गया है। बिना दलाल के किसी भी दस्तावेज की प्राप्ति असंभव हो गई है।

  • रिकॉर्ड में हेरफेर: अधिवक्ता मिश्रा का दावा है कि यदि उच्च स्तरीय टीम राजस्व रिकॉर्ड्स का भौतिक सत्यापन करे, तो भ्रष्टाचार के ऐसे रहस्य उजागर होंगे जो पूरे जिले को चौंका देंगे।

गायब अधिकारी और बदसलूकी के आरोप

नियमों के मुताबिक, तहसीलदार को सप्ताह में 3 दिन लालगांव उप-तहसील में बैठना अनिवार्य है, लेकिन पिछले डेढ़ साल से यहाँ अधिकारियों की उपस्थिति नगण्य है। इसके अलावा, तहसीलदार बिंदु तिवारी पर अधिवक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार और बदसलूकी के आरोप भी लग रहे हैं। इस तानाशाहीपूर्ण रवैये के कारण विधिक कार्य और न्याय प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

जनता की पुकार: कब होगी कार्रवाई?

सिरमौर और लालगांव की जनता अब थक चुकी है। राजस्व अभिलेखों में हेरफेर और शासकीय आदेशों की अनदेखी ने सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति की पोल खोल दी है। पीड़ित पक्ष और स्थानीय नागरिक अब सीधे जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



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