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| राजगढ़;टंकी चमकाने से बदलेगी तस्वीर या फिर कागज़ों में ही बहता रहेगा ‘हर घर जल’? |
राजगढ़ - राजगढ़ में जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्वच्छता साथियों और सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी महिलाओं को पेयजल स्रोतों की सुरक्षा, स्वच्छता और जल संरक्षण को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों ने गांवों में संचालित एकल नलजल योजनाओं के बेहतर संचालन और जल स्रोतों को लंबे समय तक सुरक्षित बनाए रखने के उपाय समझाए।
कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. इच्छित गढ़पाले, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों तथा स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े समन्वयकों ने भाग लिया। अधिकारियों ने बताया कि नलकूपों के आसपास नियमित साफ-सफाई और पानी की टंकियों की साल में कम से कम दो बार सफाई बेहद जरूरी है, ताकि ग्रामीणों तक शुद्ध पेयजल पहुंच सके।
प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, इसलिए पंचायत स्तर पर रिचार्ज शाफ्ट और रिचार्ज पिट जैसी संरचनाएं तैयार करना आवश्यक है। इसके लिए जनभागीदारी और सेल्फ हेल्प ग्रुप की मदद लेने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने वर्षा जल को भूगर्भ में पहुंचाने की तकनीकों की जानकारी भी दी, जिससे भविष्य में पेयजल संकट को कम किया जा सके।
ब्लॉक समन्वयकों द्वारा स्वच्छता साथियों को एफटीके (फील्ड टेस्ट किट) के माध्यम से पानी की गुणवत्ता जांचने का प्रशिक्षण भी दिया गया। उन्हें समझाया गया कि किस प्रकार गांवों में पेयजल स्रोतों की नियमित जांच कर दूषित पानी की पहचान की जा सकती है। अधिकारियों ने कहा कि नलजल योजनाओं के सफल संचालन में सेल्फ हेल्प ग्रुप की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है और ग्रामीण स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करना समय की जरूरत है।
हालांकि प्रशिक्षण कार्यक्रम के बीच यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या केवल प्रशिक्षण देने से गांवों में खराब पड़ी नलजल योजनाएं सुधर जाएंगी, या फिर जमीनी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही भी तय की जाएगी। कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पानी की टंकियों की सफाई और जल गुणवत्ता जांच केवल रिकॉर्ड तक सीमित रहने के आरोप लगते रहे हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जिले की कितनी नलजल योजनाओं में पिछले एक वर्ष में पानी की गुणवत्ता जांच वास्तव में हुई है, और कितनी रिपोर्ट सार्वजनिक की गई हैं?
- जब कई गांवों में पानी की टंकियों की नियमित सफाई नहीं होती, तो क्या विभाग के पास इसकी निगरानी और जिम्मेदारी तय करने का कोई ठोस सिस्टम है?
- भूजल रिचार्ज की बात हर साल होती है, लेकिन अब तक जिले में कितने रिचार्ज पिट और शाफ्ट जमीन पर बनकर चालू हालत में हैं, इसका सत्यापन कौन करेगा?
