| गौरेला-पेंड्रा; मौके पर समाधान का दावा: देवरीकला शिविर बना सुशासन तिहार का सबसे बड़ा टेस्ट Aajtak24 News |
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही - सुशासन तिहार 2026 के तहत पेण्ड्रा जनपद के क्लस्टर ग्राम पंचायत देवरीकला में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में जनभागीदारी का बड़ा दृश्य देखने को मिला। आसपास की 14 ग्राम पंचायतों—दमदम, गोढ़ा, तिलोरा, कोटमीकला, सकोला, कंचनडीह, भाड़ी, विशेषरा, पिपलामार, कुदरी, देवरीखुर्द, पीथमपुर, अमारु सहित देवरीकला—से ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी समस्याएं दर्ज कराईं।
शिविर में कुल 817 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें पेयजल, लो वोल्टेज, राजस्व, आवास और सामाजिक योजनाओं से जुड़ी शिकायतें प्रमुख रहीं। बड़ी संख्या में आए आवेदनों ने प्रशासनिक मशीनरी की तैयारियों की भी परीक्षा ली।
पेयजल और बिजली पर सख्त निर्देश
मुख्य अतिथि विधायक श्री प्रणव कुमार मरपची ने लो वोल्टेज और पेयजल समस्या को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मूलभूत समस्याएं टालने योग्य नहीं हैं।
प्रशासन का दावा: शिविरों से सीधे समाधान
कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी ने कहा कि सुशासन तिहार के तहत जिले में 10 ग्रामीण और 3 नगरीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें विभागीय स्टॉल लगाकर समस्याओं का निराकरण और योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने जनगणना कार्य में भी ग्रामीणों से सहयोग की अपील की और कहा कि दी गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
मौके पर मिला योजनाओं का लाभ
शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों को सीधे लाभ प्रदान किया गया—
- राजस्व विभाग: किसान किताब, खसरा-बी1, अधिकार अभिलेख
- पंचायत विभाग: 5 हितग्राहियों को आवास स्वीकृति प्रमाण पत्र व चाबी
- परिवहन विभाग: 14 ड्राइविंग लाइसेंस
- मत्स्य विभाग: 2 हितग्राहियों को जाल व कैरेट
- स्वास्थ्य विभाग: टीबी पोषण किट व सहायक उपकरण
- महिला एवं बाल विकास: 5 गोदभराई, 4 अन्नप्राशन, 17 सुकन्या समृद्धि लाभ
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और संदेश
शिविर में जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा, उपाध्यक्ष, पुलिस अधीक्षक श्री मनोज खिलारी सहित कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने योजनाओं की जानकारी दी और ग्रामीणों को अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 817 आवेदनों के दबाव में क्या प्रशासन ने मौके पर वास्तविक “निराकरण” किया या केवल दर्ज कर समाधान का दावा किया गया, और लंबित मामलों की समयसीमा क्या तय की गई है?
- पेयजल और लो वोल्टेज जैसी वर्षों पुरानी समस्याओं के लिए बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पा रहा है—क्या यह प्रशासनिक विफलता नहीं है?
- जनगणना और योजनाओं के लाभ के लिए ग्रामीणों की भागीदारी मांगी जा रही है, लेकिन क्या इसके बदले उन्हें वास्तविक सेवाओं की गुणवत्ता और नियमित आपूर्ति की गारंटी दी जा रही है?