| बीजापुर; चावल के साथ मिला ‘विकास का पैकेज’… बीजापुर में रोजगार, आवास और पानी पर सरकार का बड़ा फोकस Aajtak24 News |
बीजापुर - जिले की ग्राम पंचायतों में गुरुवार को आयोजित “चावल महोत्सव” इस बार सिर्फ खाद्यान्न वितरण का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसे रोजगार दिवस और आवास दिवस के साथ जोड़कर ग्रामीण विकास के बड़े अभियान का रूप दिया गया। राज्य शासन के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से जुड़ी लंबित समस्याओं के निराकरण पर विशेष जोर दिया गया।
ग्राम पंचायतों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान ग्रामीण श्रमिकों और प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को योजनाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने पंचायत स्तर पर हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उन्हें स्वीकृत राशि, निर्माण प्रक्रिया और योजनाओं के प्रावधानों से अवगत कराया। प्रशासन ने निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत सभी निर्माणाधीन आवासों को अधिकतम 90 दिनों के भीतर पूरा किया जाए। हितग्राहियों को समय पर निर्माण कार्य पूर्ण करने के लिए प्रेरित भी किया गया।
रोजगार दिवस के तहत मनरेगा के अंतर्गत चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए मई माह के भीतर सभी प्रगतिरत कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही ग्रामीणों की जरूरतों के अनुसार नए कार्यों की योजना तैयार करने पर भी चर्चा हुई। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए “मोर गांव मोर पानी मोर तरिया” अभियान के अंतर्गत “नवा तरिया आय के जरिया” थीम को प्राथमिकता देने की बात कही गई। इसके तहत क्लस्टर लेवल फेडरेशन के माध्यम से नए तालाब निर्माण की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इसके अलावा “आजीविका डबरी” मॉडल के जरिए मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन, बागवानी और अन्य आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना पर भी ग्रामीणों को जानकारी दी गई। प्रशासन का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाना भी है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- प्रधानमंत्री आवास योजना के घर 90 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन जिन हितग्राहियों को समय पर किस्त या सामग्री नहीं मिलती, उनकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
- मनरेगा के तहत कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा तय हुई है, लेकिन क्या मजदूरों को समय पर भुगतान और 100 दिन का रोजगार वास्तव में मिल पा रहा है?
- ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत नए तालाबों की बात हो रही है, तो क्या पहले से बने तालाबों और जल संरक्षण कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता का कोई सामाजिक ऑडिट कराया गया है?