बस्तर के गांव में विज्ञान और खेती का संगम, किसानों को सिखाए आधुनिक कृषि के गुर Aajtak24 News

बस्तर के गांव में विज्ञान और खेती का संगम, किसानों को सिखाए आधुनिक कृषि के गुर Aajtak24 News

बस्तर - जिले के ग्राम आड़ावाल में गुरुवार को आयोजित “विकसित कृषि संकल्प अभियान 2026” का बहुउद्देशीय शिविर ग्रामीणों के लिए किसी खुले कृषि विश्वविद्यालय से कम नहीं रहा। यहां किसानों को सिर्फ योजनाओं की जानकारी नहीं दी गई, बल्कि आधुनिक खेती, पशुपालन और तकनीकी नवाचारों के जरिए आत्मनिर्भर बनने का रास्ता भी दिखाया गया। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत आयोजित इस शिविर का संचालन शहीद गुण्डाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में ग्राम सरपंच श्रीमती जयंती कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।

शिविर में कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों को नील हरित शैवाल के उपयोग, उन्नत नस्ल चयन, आधुनिक पशुपालन और पराली प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। वैज्ञानिकों ने बताया कि तकनीक आधारित खेती अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और लागत कम कर सकते हैं। कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा वेटनरी पॉलीटेक्निक के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में 16 विद्यार्थियों ने पशुपालन के महत्व और सरकारी योजनाओं को बेहद सरल और प्रभावी अंदाज में प्रस्तुत किया। ग्रामीणों ने इस प्रस्तुति को खूब सराहा और कई किसान मौके पर ही योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन करते नजर आए।

शिविर में डॉ. नीता मिश्रा, डॉ. जागेश्वरी तिग्गा और श्रीमती वेणुलता कोड़ोपी सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। वहीं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी शैलेश कुमार मरकाम, पटवारी खीरेंद्र ध्रुव, सचिव श्रीमती तुलसी साहू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पशु सखियों और मितानिनों ने आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी और उत्साह के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने यह संकेत दिया कि बस्तर में खेती अब पारंपरिक सीमाओं से निकलकर तकनीक और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. कृषि शिविरों में किसानों को आधुनिक तकनीक की जानकारी तो दी जाती है, लेकिन क्या गांवों में उन तकनीकों को लागू करने के लिए पर्याप्त संसाधन और फील्ड सपोर्ट उपलब्ध है?
  2. किसानों की आय दोगुनी करने की बात वर्षों से हो रही है, तो क्या प्रशासन के पास ऐसा कोई डेटा है जिससे साबित हो कि इन योजनाओं से किसानों की वास्तविक आय बढ़ी है?
  3. पराली प्रबंधन और उन्नत कृषि तकनीकों पर जोर दिया गया, लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए मशीनरी और आर्थिक सहायता की क्या ठोस व्यवस्था की गई है?

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