| बीजापुर; जहां कभी लगती थी जन-अदालत… वहां पहली बार पहुंचा पूरा प्रशासन Aajtak24 News |
बीजापुर - जिले के माओवादी प्रभावित और बेहद सुदूर ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर में गुरुवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने इलाके के बदलते हालात की नई तस्वीर पेश की। जिस जगह कभी जनताना सरकार की जन-अदालत लगती थी, वहां पहली बार प्रशासन का व्यापक जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के “सुशासन तिहार-2026” के तहत आयोजित इस महाशिविर में प्रशासन के लगभग सभी विभाग गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने भी उत्साह के साथ शिविर में भाग लिया और योजनाओं की जानकारी लेकर आवेदन जमा किए। स्थानीय भाषा में दी गई जानकारी ने ग्रामीणों की सहभागिता को और बढ़ाया।
शिविर में पुजारी कांकेर सहित आसपास की 18 ग्राम पंचायतों के लोग पहुंचे। प्रशासन के अनुसार प्राप्त आवेदनों में से 29 मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि शेष आवेदनों पर प्रक्रिया जारी है। क्रेडा, जल जीवन मिशन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वन, आयुष, मत्स्य, राजस्व और पंचायत विभाग सहित कई विभागों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए। पात्र हितग्राहियों को बैशाखी, वाकिंग स्टिक, श्रवण यंत्र, मत्स्य जाल, आईस बॉक्स और मृदा परीक्षण प्रमाण पत्र जैसी सामग्रियों का वितरण किया गया।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और नवजात शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया गया। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों की मुफ्त जांच और दवा वितरण किया। पशुधन विकास विभाग ने पशुओं के उपचार और संक्रमण से बचाव की जानकारी दी।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने कहा कि यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन संकल्प का परिणाम है कि अब प्रशासन उन इलाकों तक पहुंच रहा है जहां कभी माओवाद के कारण लोग खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते थे। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण बिना डर के अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रख रहे हैं। एसडीएम उसूर भूपेंद्र गावरे और जनपद पंचायत सीईओ प्रभाकर चंद्राकर के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर को प्रशासन ने क्षेत्र में विश्वास बहाली और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रेस वार्ता के लिए 3 तीखे सवाल
- पुजारी कांकेर जैसे इलाकों में पहली बार प्रशासनिक शिविर लगना क्या यह स्वीकार नहीं करता कि अब तक ये क्षेत्र शासन की पहुंच और मूल सुविधाओं से दूर थे?
- 29 आवेदनों के मौके पर निराकरण की बात कही गई है, लेकिन बाकी लंबित मामलों के समाधान की समय-सीमा और निगरानी की क्या व्यवस्था है?
- माओवादी प्रभाव कम होने के दावे किए जा रहे हैं, तो क्या अब इन गांवों में स्थायी स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार जैसी मूलभूत सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराने की ठोस योजना तैयार की गई है?