बलौदाबाजार; मंच पर ही राशन कार्ड से लेकर आवास की चाबी तक—ग्रामीणों को मिला तत्काल लाभ Aajtak24 News

बलौदाबाजार; मंच पर ही राशन कार्ड से लेकर आवास की चाबी तक—ग्रामीणों को मिला तत्काल लाभ Aajtak24 News

बलौदाबाजार - छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिला में सुशासन तिहार 2026 के तहत दूसरे दिन चार अलग-अलग स्थानों पर समाधान शिविरों का आयोजन किया गया, जिनमें ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया। विकासखंड भाटापारा के ग्राम मोपर, पलारी के ग्राम ससहा, कसडोल के ग्राम डेराडीह तथा नगर पंचायत पलारी में आयोजित इन शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

शिविरों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जॉब कार्ड, पीएम आवास की चाबी, मछली पालन से जुड़े महाजाल और आइस बॉक्स, फलदार पौधे, खेल सामग्री सहित कई प्रकार की सामग्री का वितरण किया। खाद्य, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उद्यानिकी, समाज कल्याण और खेल विभाग सहित कई विभागों की योजनाओं का लाभ मौके पर ही दिया गया। कई मामलों में फाइलें तैयार कर तत्काल निराकरण भी किया गया, जिससे ग्रामीणों को सीधा फायदा मिला।

इन शिविरों में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, मजदूरी भुगतान, बिजली, पेयजल, आधार और राशन कार्ड जैसे लंबित मामलों पर भी काम किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक आवेदन का अधिकतम एक माह के भीतर निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा। शिविर का सबसे आकर्षण केंद्र रहा “सुशासन सेल्फी पॉइंट”, जहां ग्रामीणों ने उत्साह के साथ सेल्फी ली। यह पहल कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी बढ़ाने का माध्यम बनी।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शिशुवती महिलाओं को सुपोषण किट वितरित की गई, वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा हेल्थ कैंप लगाया गया। गर्मी को देखते हुए ओआरएस घोल की व्यवस्था भी की गई। कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, डॉ. सनम जांगड़े सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या मौके पर समाधान का जो दावा किया जा रहा है, उसके बाद भी कितने मामलों में वास्तव में एक महीने के भीतर पूर्ण निराकरण हो पाता है?
  2. चार अलग-अलग शिविरों में एक साथ इतने विभागों की मौजूदगी के बावजूद क्या संसाधन और स्टाफ पर्याप्त हैं या काम केवल दिखावे तक सीमित रह जाता है?
  3. ‘सुशासन सेल्फी’ जैसी गतिविधियां आकर्षण बन रही हैं, लेकिन क्या इससे वास्तविक समस्याओं के समाधान की गुणवत्ता और प्राथमिकता प्रभावित तो नहीं हो रही?

Post a Comment

Previous Post Next Post